इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छह महीने पहले संसद में रखी अलग सिंध प्रदेश की अपनी मांग को लेकर सांसद शंकर लालवानी घिर गए हैं और अब पार्टी के दबाव में उन्हें बयान से पलटना पड़ा। रविवार को उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर हम कोई अलग प्रदेश की मांग नहीं करते और होना भी नहीं चाहिए। अपने समाज को खुश करने के लिए रखी सांसद की मांग राजनीतिक मुद्दा बन गई है और विरोधी दल इसे भुनाने में लगे हैं। सांसद की अलग प्रदेश की मांग से उनकी पार्टी भी इत्तेफाक नहीं रखती। यही कारण है कि लालवानी को भी अपनी बात का खंडन करना पड़ा।

22 मार्च को सांसद लालवानी ने सदन में सिंधी भाषा में अपनी बात रखते हुए सिंधी कला बोर्ड, सिंधी टीवी चैनल और अलग सिंधी प्रदेश की मांग पर सरकार को विचार करने के लिए कहा था। तब तो यह मुद्दा राजनीतिक रूप से नहीं उछला, लेकिन अब वायरल वीडियो उनके गले की हड्डी बन गया है।

सांसद लालवानी से सीधे सवाल

- क्या आपने सिंधी प्रदेश की मांग की?

सदन में मैंने कहा कि पाकिस्तान के सिंध प्रदेश में अलग प्रदेश की मांग चल रही है। हमारे यहां नहीं। मैंने तो 26 जनवरी पर झांकी निकालने की मांग की थी, क्योंकि हमारा अलग से सिंधी प्रदेश नहीं है। सिंध घाटी और मोहन जोदड़ों की पुरानी सभ्यता है। इसकी सांस्कृतिक विरासत की झांकी निकलनी चाहिए।

- क्या आप अलग प्रदेश के पक्षधर हैं?

बिलकुल नहीं। जाति धर्म के आधार पर हम कोई अलग प्रदेश की मांग नहीं करते और यह होना भी नहीं चाहिए।

- कांग्रेस कह रही है कि आपको पूरे शहर ने वोट देकर संसद भेजा है, फिर सिर्फ समाज के ही मुद्दे क्यों उठाते हैं?

मैं पांच साल के लिए सांसद हूं। हमेशा हिंदी में ही अपनी बात रखता हूं। देश का एकमात्र सिंधी सांसद हूं। दो मिनट सिंधी भाषा में समाज की बात उठाने में क्या हर्ज है? शहर की समस्याओं को लेकर तो हमेशा ही मांग रखता हूं।

बंटवारे की विचारधारा है भाजपा की

सांसद लालवानी को लोगों ने वोट देकर संसद में भेजा है। यदि उनकी भाषा ऐसी है तो यह इंदौर का अपमान है। हम तो शुरू से कहते हैं कि भाजपा की विचारधारा जाति और धर्म के आधार पर बंटवारा कर सत्ता पाने की रही है। - जीतू पटवारी, कांग्रेस विधायक

सदन में यह बोले थे लालवानी

20 मार्च को सदन में लालवानी ने कहा था- 'सरकार विचार करे कि जो सिंधी पाकिस्तान से भारत आए हैं उनकी हालत ठीक नहीं है। उनके विकास के लिए सिंधी कल्याण बोर्ड बनना चाहिए। सिंधी कला और संस्कृति दुनिया की पुरानी संस्कृतियों में से एक है, इसलिए राष्ट्रीय सिंधी कला अकादमी होनी चाहिए। देश में अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में टीवी चैनल है। सिंधी भाषा में भी एक टीवी चैनल होना चाहिए। 26 जनवरी को दिल्ली की परेड में सभी प्रदेशों की झांकी निकलती है। देश में अलग से सिंधी प्रदेश नहीं है, इस कारण सिंधी समाज की झांकी भी निकलनी चाहिए। सिंध प्रदेश पाकिस्तान में रह गया है। सिंधी समाज मांग करता है कि भारत में भी सिंधी प्रदेश होना चाहिए। एक सिंधी विश्वविद्यालय भी देश में होना चाहिए।'

Posted By: Nai Dunia News Network

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