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'इंदौर नगर निगम का सालाना बजट 8,500 करोड़, इसके बावजूद शहर में पीने के पानी की स्थिति अफ़्रीका के छोटे गांवों जैसी'

विधानसभा में विपक्ष के नेता ने शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की सप्लाई से कई नागरिकों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Fri, 02 Oct 2026 05:24:46 PM (IST)Updated Date: Fri, 02 Oct 2026 05:35:12 PM (IST)
'इंदौर नगर निगम का सालाना बजट 8,500 करोड़, इसके बावजूद शहर में पीने के पानी की स्थिति अफ़्रीका के छोटे गांवों जैसी'

HighLights

  1. कहा, रिपोर्ट जारी होने के बाध भी जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं
  2. विजयवर्गीय, पुष्यमित्र भार्गव और पार्षद बघेला को बचाने का आरोप
  3. सीवरेज पाइपलाइन से जुड़े दस्तावेज मांगने पर भी उपलब्ध नहीं कराए

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश में सत्ताधारी भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट आने के बाद भी इस बड़े शहर में पीने के पानी की स्थिति अफीक्रा के छोटे गांवों जैसी है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता ने शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की सप्लाई से कई नागरिकों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मेयर पुष्यमित्र भार्गव के इस्तीफे की भी मांग की।

रिपोर्ट जारी लेकिन जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं

इंदौर में पत्रकारों से बात करते हुए सिंघार ने कहा, पीने ​​के पानी की त्रासदी पर एक बड़ी जांच रिपोर्ट तैयार की गई थी, लेकिन स्थिति 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया' वाली कहावत जैसी है, क्योंकि रिपोर्ट जारी होने के बाद भी राज्य सरकार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।


उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को तुरंत जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। सिंघार ने दावा किया कि इंदौर में पीने के पानी का संकट आए कई महीने बीत जाने के बाद भी लोग और सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीज दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

शहर में पीने के पानी की स्थिति अफ्रीका के छोटे गांवों जैसी है

सिंघार के अनुसार, विधानसभा में कई बार भरोसा दिलाने के बावजूद राज्य सरकार लोगों को साफ पीने का पानी उपलब्ध कराने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा, इंदौर नगर निगम का सालाना बजट 8,500 करोड़ रुपये है। इसके बावजूद, इंदौर जैसे बड़े शहर में पीने के पानी की स्थिति अफ्रीका के छोटे गांवों जैसी है।

कांग्रेस नेता सिंघार ने दावा किया कि राज्य में सत्ताधारी भाजपा कभी नहीं चाहती थी कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के मामले की जांच के लिए बनाए गए न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

विजयवर्गीय, पुष्यमित्र भार्गव और पार्षद बघेला को बचाने का आरोप

कांग्रेस नेता सिंघार ने आरोप लगाया कि कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय, मेयर पुष्यमित्र भार्गव और इलाके के पार्षद कमल बघेला को बचाने के लिए राज्य सरकार ने पूर्व हाई कोर्ट जज सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले एक-सदस्यीय आयोग के सामने असहयोग और हेरफेर का सहारा लिया।

सीवरेज पाइपलाइन से जुड़े दस्तावेज मांगने पर भी उपलब्ध नहीं कराए

सिंघार ने कहा कि पीने के पानी और सीवरेज पाइपलाइन से जुड़े दस्तावेज मांगने पर भी आयोग को उपलब्ध नहीं कराए गए। रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में पाइपलाइन प्रोजेक्ट में टेंडर बुलाने से लेकर काम पूरा होने तक कुल 859 दिनों की देरी हुई। इसमें से 66 दिनों की देरी सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि मेयर भार्गव ने फाइल पर साइन नहीं किए थे।

भार्गव जनता को बताएं फाइल 66 दिनों तक क्यों रोकी गई

मेयर के इस्तीफे की मांग करते हुए सिंघार ने कहा, भार्गव को जनता को बताना चाहिए कि यह फाइल 66 दिनों तक क्यों रोकी गई। क्या यह फाइल इसलिए रोकी गई थी ताकि पाइपलाइन बिछाने का कॉन्ट्रैक्ट पाने वाली कंपनी से कमीशन लिया जा सके?

ज्यूडिशियल कमीशन की 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि भागीरथपुरा में सीवेज और पीने के पानी की पाइपलाइनें नियमों और मानकों का उल्लंघन करते हुए अगल-बगल बिछाई गई थीं, जिसके कारण पीने के पानी में सीवेज का पानी मिल गया।

दूषित पीने के पानी में ई. कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म जैसे बैक्टीरिया मिले

रिपोर्ट के अनुसार, दूषित पीने के पानी में ई. कोलाई (E. coli) और टोटल कोलीफॉर्म जैसे बैक्टीरिया पाए गए और इस पानी को पीने से गैस्ट्रोएंटेराइटिस, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियां हुईं। भागीरथपुरा में दूषित पीने की पानी की सप्लाई के कारण लोगों के बीमार पड़ने के मामले दिसंबर 2025 में सामने आए थे।

कांग्रेस पार्टी का दावा, इस प्रकोप में 36 लोगों की मौत हुई

कांग्रेस पार्टी का दावा है कि इस प्रकोप में 36 लोगों की मौत हुई। ज्यूडिशियल कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग को 12 फरवरी तक भागीरथपुरा में 35 मौतों की जानकारी मिली थी और इनमें से 22 मौतें दूषित पीने के पानी की सप्लाई की घटना से संभवतः जुड़ी मानी गईं।

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