
Indore News: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। देश के सबसे स्वच्छ और स्मार्ट शहर इंदौर को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में अव्वल स्थान मिला है। कड़ी मेहनत करना और अव्वल आना इंदौर की आदत में शुमार हो चुका है। कभी इंदौर की आबोहवा में धूल के कण और खतरनाक पार्टिकल इतने अधिक होते थे कि यहां की तुलना दिल्ली के वायु प्रदूषण से की जाने लगी थी, लेकिन स्वच्छता में नंबर वन शहर ने कड़ी मेहनत कर अपनी यह तस्वीर बदल ली। निगम के साथ इंदौरियों ने हाथ मिलाया और स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर पहले पायदान पर अपना झंडा गाड़ा। हालांकि, यह इतना आसान भी नहीं था। नंबर वन आने की आदत को बरकरार रखने के लिए शहर ने जी-तोड़ मेहनत की और नंबर वन आकर ही दम लिया।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण वर्ष 2022-23 में इंदौर शहर को स्वच्छ वायु के प्रयासों में प्रथम स्थान एवं 1.50 करोड़ की राशि का पुरस्कार मिलना प्रशंसनीय है। वाहन एवं कारखानों के प्रदूषण पर नियंत्रण, ठोस ईंधन जलाने पर रोक, तोड़फोड़ व निर्माण कार्यों में धूल की रोकथाम, उचित कचरा प्रबंधन एवं हरियाली विस्तार उपायों के जो प्रयास किए गए, इन्हें आगे भी इसी प्रकार जारी रखना होगा तभी वायु स्वच्छ बनी रहेगी।
पर्यावरणविद डा. ओपी जोशी कहते हैं, स्वच्छ वायु से नागरिकों में श्वसन रोगों में भी कमी होगी। इन प्रयासों के साथ कुछ प्रयास और भी करने होंगे, जैसे वाहनों में ओवरलोडिंग पर रोक, सर्विस सेंटर या गैरेज से पैदा होने वाले प्रदूषण पर रोक, मुक्तिधामों में दाह संस्कार से पैदा प्रदूषण पर रोक एवं पुराने पेड़ों के संरक्षण जैसे प्रयासों की जरूरत है। पुरस्कार से प्राप्त राशि का उपयोग स्वच्छता बनाए रखने के प्रयासों में किया जाए। शिखर पर पहुंचने के बाद शिखर पर बने रहना बड़ी चुनौती होती है। अब शहर को इस चुनौती का सामना करना है।
इंदौर में प्रदूषण दूर करने में नगर निगम का अहम योगदान रहा है। किसी समय शहर में डीजल से चलने वाली बसों की वजह से प्रदूषण फैलता था। इन बसों से निकलने वाले धुएं की वजह से सड़क पर चलने वाले दोपहिया वाहन चालकों का सांस लेना तक मुश्किल हो जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। नगर निगम ने डीजल से चलने वाली सिटी बसों को सीएनजी बसों और ई-बसों से बदल दिया है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शहर में अलग-अलग क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए। शहर को धूल मुक्त बनाने के लिए 22 सक्शन मशीनें सड़कों पर उतार दीं। असर यह हुआ कि शहर में धूल कम हुई। डोर-टू-डोर कचरा एकत्रित करने वाले डीजल से चलने वाले वाहनों को भी इलेक्ट्रिक वाहनों से बदला जा रहा है।
इंदौर में कचरा जलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहन से कचरा जमा कर, इसे निपटान के लिए ट्रैंचिंग ग्राउंड भेजा गया। कचरे से सीएनजी बनाई जाने लगी जो सिटी बसों के लिए उपलब्ध करवाई जा रही है। रोजाना 18 हजार किलो सीएनजी बनाई जा रही है। इसके अलावा कचरे से खाद बनाई जा रही है। ग्रीन वेस्ट को जलाने के बजाय अलग-अलग जगह प्लांट स्थापित कर कंपोस्ट खाद बनाई जा रही है। नगर निगम द्वारा शुरू किए गए सिग्नल बंद-इंजन बंद अभियान को भी शहर की जनता का अच्छा प्रतिसाद मिला।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2023 में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों को पछाड़ते हुए इंदौर ने सफलता हासिल की है। शहर ने 200 में से 187 अंक प्राप्त करते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह लक्ष्य पाना इतना भी आसान नहीं था। प्रदूषण को नियंत्रण करने के उद्देश्य से निर्धारित सात मापदंडों को पूरा किया है। साथ ही वायु गुणवत्ता सूचकांक को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास भी किए। इसके तहत जनजागरूकता लाने के लिए चौराहों पर रेड सिग्नल आन, इंजन आफ अभियान चलाया गया। वहीं उद्योगों में कोयले के स्थान पर सीएनजी बायलर के उपयोग, शहरी क्षेत्रों में कोयले और लकड़ी से जलने वाले तंदूर और भट्टियों पर रोक लगाई गई।
शहर की आबोहवा को स्वच्छ बनाए रखने के प्रयास सतत जारी हैं। इस सफलता का श्रेय शहरवासियों को जाता है। उनके सहयोग के बगैर यह संभव नहीं था। हमारा प्रयास इस सफलता को सतत बनाए रखना और इंदौर की आबोहवा को बेहतर बनाए रखना होगा। हमने सिग्नल रेड इंजन आफ अभियान शुरू किया है। मैं नागरिकों से अपील करता हूं कि सिग्नल रेड होने पर वे अपने वाहन बंद कर प्रदूषण फैलने से रोकें। - पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर