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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 10, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Indore News: इंदौर के दो पूर्व कांग्रेस विधायकों का भाजपा आगमन, कितना फायदा, कितना नुकसान

Indore News:2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इंदौर क्षेत्र एक और देपालपुर से कांग्रेस पर करीब एक लाख 58 हजार मतों से बढ़त ली थी।

By Kuldeep BhawsarEdited By: Hemraj Yadav
Publish Date: Sun, 10 Mar 2024 09:13:59 PM (IST)Updated Date: Sun, 10 Mar 2024 09:14:22 PM (IST)
Indore News: इंदौर के दो पूर्व कांग्रेस विधायकों का भाजपा आगमन, कितना फायदा, कितना नुकसान

HighLights

  1. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इंदौर विधानसभा क्षेत्र एक में भाजपा को 71 प्रतिशत और कांग्रेस को 27 प्रतिशत मत मिले थे।
  2. इसी तरह देपालपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 63 प्रतिशत मत मिले थे तो कांग्रेस को सिर्फ 33 प्रतिशत।
  3. दोनों पूर्व विधायकों के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने का कोई खास नुकसान कांग्रेस को होता नजर नहीं आ रहा।

Indore News:नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। कांग्रेस के दो पूर्व विधायक संजय शुक्ला और विशाल पटेल भाजपा का दामन थाम चुके हैं। दोनों ही वर्ष 2018 में कांग्रेस के झंडे तले विधायक चुने गए थे और दोनों ही को वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। लोकसभा चुनाव सामने हैं। ऐसे में जिन दो विधानसभा क्षेत्रों से ये दोनों नेता आते हैं, वहां की स्थिति का विश्लेषण बताता है कि चाहे बात इंदौर विधानसभा क्षेत्र एक की हो या विधानसभा क्षेत्र देपालपुर की, दोनों ही जगह लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है।

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इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मिलाकर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कांग्रेस पर करीब एक लाख 58 हजार मतों की बढ़त हासिल हुई थी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इंदौर विधानसभा क्षेत्र एक में भाजपा को 71 प्रतिशत मत मिले थे, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 27 प्रतिशत। इसी तरह देपालपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 63 प्रतिशत मत मिले थे तो कांग्रेस को सिर्फ 33 प्रतिशत। ऐसी स्थिति में राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दोनों पूर्व विधायकों के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने का कोई खास नुकसान कांग्रेस को होता नजर नहीं आ रहा।


आसान नहीं होगी स्वीकार्यता स्थापित करना

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दोनों ही पूर्व विधायकों के सामने भाजपा कार्यकर्ताओं के समक्ष अपनी स्वीकार्यता स्थापित करने की चुनौती होगी। इसके पहले वर्ष 2020 में कांग्रेस के विधायक तुलसीराम सिलावट भाजपा में शामिल हुए थे। उनके विधायकी से इस्तीफा देने के तुरंत बाद उपचुनाव में भाजपा ने उन्हें सांवेर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा था। उस वक्त परिस्थितियां पूरी तरह से भिन्न थी। वर्तमान में विधानसभा चुनाव साढ़े चार वर्ष दूर हैं। भाजपा में अपने नेताओं को लेकर किसी तरह का कोई विरोध भी नहीं हैं, ऐसे में आयातित शुक्ला और पटेल को भाजपा कार्यकर्ता कितना महत्व देते हैं, यह रहस्य तो भविष्य ही बताएगा।

टंडन को नहीं मिला था अपेक्षित सम्मान

इसके पहले कांग्रेस के शहर अध्यक्ष रहे प्रमोद टंडन भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे. लेकिन वहां उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला और बाद में वे फिर कांग्रेस में लौट आए। ऐसे में शुक्ला और पटेल दोनों ही के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं की नजर में सम्मान अर्जित करना एक बड़ी चुनौती है।

यह थी वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव की स्थिति

विधानसभा क्षेत्र भाजपा कांग्रेस
देपालपुर 115548 60345
इंदौर एक 166321 63638