Indore News: इंदौर शहर में वर्ष 1910 में भी थी घर-घर कचरा कलेक्शन व्यवस्था
Indore News: इंदौर की स्वच्छता पर हुए शोध में सामने आया इतिहास। रोज शहरभर से कचरा और मल जमाकर इन गड्ढों में दो परतों में डाल दिया जाता था। ...और पढ़ें
By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Thu, 04 Jan 2024 11:08:05 AM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jan 2024 02:47:26 PM (IST)
इंदौर शहर में वर्ष 1910 में भी थी घर-घर कचरा कलेक्शन व्यवस्था Indore News: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर की स्वच्छता का लोहा आज ही नहीं बल्कि कई दशक पहले से देशभर में माना जाता है। इंदौर मैथड आफ वेस्ट डिस्पोजल की चर्चा पूरे देश में होती थी। महात्मा गांधी स्वयं इसे देखने इंदौर आए थे। वर्ष 1910 में भी शहर में घर-घर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था लागू थी। आज गूंजने वाला स्वच्छ इंदौर, स्वस्थ इंदौर का नारा पहली बार वर्ष 1957 में सामने आया था।
यह दिलचस्प जानकारियां सामने आई हैं
इंदौर की स्वच्छता को लेकर हुए अपनी तरह के पहले शोध में। यह शोध शोधार्थी जितेंद्र जाखेटिया ने किया। शोध में इंदौर की स्वच्छता के 223 वर्षों के इतिहास को खंगाला गया है। शोध से यह जानकारी सामने आई है कि वर्ष 1900 में इंदौर में इंदौर मेथर्ड आफ वेस्ट डिस्पोजल के तहत
देवगुराडिया क्षेत्र में विशेष व्यवस्था की गई थी। इसके तहत 31 गहरे और बड़े गड्ढे खोदे गए थे। प्रत्येक दिन के लिए एक गड्ढा नियत था।
अर्थदंड की भी व्यवस्था थी शहर में
रोज शहरभर से कचरा और मल जमाकर इन गड्ढों में दो परतों में डाल दिया जाता था। इसके एक माह बाद गड्ढे से इसे जैविक खाद के रूप में बाहर निकाल कर इस्तेमाल किया जाता था। शोध में यह बात भी सामने आई है कि वर्ष 1913 में इंदौर में सड़क पर कचरा फेंकने वालों पर अर्थदंड लगाने की व्यवस्था लागू की गई थी। देवगुराडिया ट्रेंचिंग ग्राउंड वर्ष 1970 में अस्तित्व में आया। इसके पहले इंदौर शहर में पंचकुइया, जूनी इंदौर और बाणगंगा क्षेत्र में ट्रेंचिंग ग्राउंड हुआ करते थे।