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इंदौर के पीसी सेठी अस्पताल में 500 मरीज रोज, 40 को सोनोग्राफी की जरूरत; सुविधा सिर्फ चार दिन!

Indore Government Hospital: इंदौर में पीसी सेठी अस्पताल में लिफ्ट भी इमरजेंसी के भरोसे, गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियों से आना-जाना पड़ता है।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 11:03:18 AM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 11:11:38 AM (IST)
इंदौर के पीसी सेठी अस्पताल में 500 मरीज रोज, 40 को सोनोग्राफी की जरूरत; सुविधा सिर्फ चार दिन!
पीसी सेठी अस्पताल में रोजाना ओपीडी में लगभग 500 मरीज पहुंचते हैं। सौजन्य -नईदुनिया

HighLights

  1. अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही उपलब्ध
  2. इससे मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है
  3. मंगलवार, शनिवार और रविवार को सोनोग्राफी नहीं होती है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। पीसी सेठी शासकीय अस्पताल में मरीजों का दबाव लगातार बना रहता है। यहां रोजाना करीब 500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, लगभग 10 गर्भवती महिलाएं जांच और चेकअप के लिए आती हैं जबकि अस्पताल में प्रतिदिन 12 से 15 महिलाओं की प्रसूति हो रही है।

गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों की जांच के लिए रोजाना करीब 35 से 40 सोनोग्राफी की जरूरत पड़ती है। इसके बावजूद अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही उपलब्ध है। इससे मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है।


आपात स्थिति में गायनेकोलाजिस्ट कर रही सोनोग्राफी

अस्पताल में सोनोग्राफी की जरूरत को देखते हुए एक गायनेकोलॉजिस्ट को सोनोग्राफी की ट्रेनिंग दी गई है। आपात स्थिति में इनकी सेवाएं ली जा रही हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार सामान्य दिनों में भी सोनोग्राफी की मांग काफी अधिक रहती है। वर्तमान व्यवस्था में मंगलवार, शनिवार और रविवार को सोनोग्राफी नहीं होती है।

चार बांडेड डॉक्टरों की पदस्थापना

अस्पताल लंबे वक्त से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा था। हाल ही में यहां चार बांडेड डॉक्टरों की पदस्थापना भी की गई है। इससे चिकित्सा सेवाओं में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि अस्पताल में मानव संसाधन से जुड़ी अन्य जरूरतें भी बनी हुई हैं। अस्पताल को सुरक्षा गार्ड और लिफ्टमैन की आवश्यकता है। इसके लिए सीएमएचओ को पत्र भी लिखा गया है।

पीडियाट्रिक आईसीयू किया जा रहा शिफ्ट

पीसी सेठी में संचालित होने वाला पीडियाट्रिक आईसीयू अब जिला अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। इसके चलते विभाग के कर्मचारियों के साथ सारी मशीनरी को भेजने का कार्य किया जा रहा है। फिलहाल अस्पताल में बड़े आईसीयू के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। इसके चलते आईसीयू विस्तार की संभावनाएं जगह की उपलब्धता पर निर्भर हैं।

ऑप्थेल्मिक आईसीयू में डॉक्टरों की कमी

अस्पताल में आप्थेल्मिक आईसीयू की सुविधा भी है, लेकिन यहां चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। पहले चार चिकित्सक सेवाएं दे रहे थे, लेकिन इनमें से तीन चिकित्सक नौकरी छोड़कर चले गए। वर्तमान में केवल एक चिकित्सक उपलब्ध है। ऐसे में विभाग की सेवाओं पर काम का दबाव बढ़ा है।

अब न्यू बोर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट की तैयारी

अस्पताल में आगे न्यू बोर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) शुरू करने की भी योजना है। इससे नवजात शिशुओं को शुरुआती स्तर पर आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके लिए अस्पताल में सुविधाओं को विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

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एक लिफ्ट चालू, दूसरी बंद

अस्पताल में दो लिफ्ट हैं, लेकिन एक समय में एक ही लिफ्ट चालू रखी जाती है, जबकि दूसरी बंद रहती है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को कई बार पहली और दूसरी मंजिल तक सीढ़ियों से जाने को मजबूर होना पड़ता है। वहीं, जिम्मेदार इमरजेंसी का हवाला देकर एक लिफ्ट बंद रखने की बात कहते हैं।

सप्ताह में दो दिन साइकेट्रिक ओपीडी

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं के लिए अस्पताल में साइकेट्रिक ओपीडी सप्ताह में दो दिन संचालित होती है। इससे मरीजों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श और उपचार की सुविधा मिल रही है। अस्पताल में मरीजों की संख्या को देखते हुए विभिन्न विभागों की सेवाओं और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती है।

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