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कम बारिश से इंदौर में बदलेगी रबी की खेती, गेहूं का रकबा 30 हजार हेक्टेयर तक घटेगा; चना-सरसों की बोवनी बढ़ेगी

कम वर्षा के कारण इंदौर में रबी सीजन में गेहूं का रकबा घटेगा। कृषि विभाग चना और सरसों जैसी कम पानी वाली फसलों की बोवनी बढ़ाने की तैयारी में है।

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 11:56:10 AM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 11:56:10 AM (IST)
कम बारिश से इंदौर में बदलेगी रबी की खेती, गेहूं का रकबा 30 हजार हेक्टेयर तक घटेगा; चना-सरसों की बोवनी बढ़ेगी
कम बारिश से इंदौर में रबी की खेती बदलेगी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. इंदौर में कम बारिश से रबी फसलों की बोवनी प्रभावित होगी।
  2. गेहूं का रकबा 25 से 30 हजार हेक्टेयर घटेगा।
  3. चना और सरसों की बोवनी बढ़ाने पर विभाग का जोर।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: जिले में इस बार कम वर्षा का असर रबी सीजन की फसलों की बोवनी पर दिखाई देगा। पानी की उपलब्धता कम होने के कारण कृषि विभाग ने अधिक सिंचाई की जरूरत वाली गेहूं की फसल का रकबा घटाने और कम पानी में तैयार होने वाली चना व सरसों की बोवनी बढ़ाने की तैयारी की है। जिले में करीब 2.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बोवनी होती है।

पिछले वर्ष 2.27 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था, लेकिन इस बार इसका रकबा 25 से 30 हजार हेक्टेयर तक घटने की संभावना है। विभाग ने गेहूं की बोवनी का लक्ष्य दो लाख हेक्टेयर के करीब रखा है। कम पानी की स्थिति को देखते हुए चना किसानों के लिए प्रमुख विकल्प रहेगा। कृषि विभाग ने इस बार चने का रकबा करीब 18 से 20 हजार हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान लगाया है।


इसी तरह तिलहन फसल सरसों की बोवनी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। जिले में करीब पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बोवनी कराने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि बीते सीजन में सरसों का रकबा महज 15 हेक्टेयर के करीब था। आलू और लहसुन की उपज का रकबा भी कम होने का अनुमान है।

दो पानी वाली फसल पर फोकस

कृषि अधिकारियों के अनुसार गेहूं की तुलना में चना और सरसों में सिंचाई की जरूरत कम होती है। दोनों फसलों को सामान्य परिस्थितियों में करीब दो पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं है, वहां किसानों को इन फसलों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

बीज उपलब्धता पर भी फोकस

कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली किस्मों के बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग बीज कंपनियों और निर्माताओं से चर्चा कर रहा है। विभाग का प्रयास है कि किसानों को समय पर उपयुक्त बीज उपलब्ध हो सकें।

अधिकारियों और मैदानी अमले का प्रशिक्षण 30 सितंबर को

वहीं कृषि विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले का 30 सितंबर को प्रशिक्षण होगा। इसमें कम पानी वाली फसलों, उनकी बोवनी और उत्पादन संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद अधिकारी किसानों के बीच पहुंच जल उपलब्धता के अनुसार फसल चयन के लिए जागरूक करेंगे।

बीते दो रबी सीजन में गेहूं, चना और सरसों का रकबा (हेक्टेयर में)

फसल 2024-25 2025-26

  • गेहूं 2.23 लाख 2.27 लाख
  • चना 2656 1800
  • मटर 119 150
  • सरसों 06 15
  • आलू व अन्य 19240 16000

कम पानी में भी किसानों को अच्छा उत्पादन मिले, इसके लिए संवाद की पहल शुरू कर रहे हैं। अधिकारी जिले में जाकर फसल चयन और बीज उपलब्धता की जानकारी देंगे। अधिक पानी की जरूरत वाली गेहूं फसल का रकबा कम होगा, विकल्प में सरसों और चना की जानकारी दे रहे हैं। संदीप यादव, उप संचालक कृषि

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