इंदौर के श्री सत्य साईं विद्या विहार स्कूल पर 4.30 करोड़ संपत्तिकर बकाया, कोर्ट ने टैक्स छूट का दावा खारिज किया
इंदौर कोर्ट ने श्री सत्य साईं विद्या विहार पर निगम का संपत्तिकर सही ठहराया। स्कूल को 4.30 करोड़ बकाया और हर साल 45 लाख रुपये कर देना होगा।
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 09:40:37 AM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 09:40:37 AM (IST)
इंदौर के श्री सत्य साईं विद्या विहार स्कूल को कोर्ट से मिला झटका (फाइल फोटो)HighLights
- स्कूल पर करीब 4.30 करोड़ रुपये संपत्तिकर बकाया है।
- हर साल 45 लाख रुपये संपत्तिकर जमा करना होगा।
- कोर्ट ने निगम की संपत्तिकर गणना और नोटिस सही माना।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: स्कीम-54 स्थित श्री सत्य साईं विद्या विहार कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने स्कूल पर निगम की ओर से जारी संपत्तिकर की मांग को सही ठहराते हुए स्कूल प्रबंधन को कर की राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं।
निगम के मुताबिक स्कूल पर फिलहाल करीब 4 करोड़ 30 लाख रुपये का संपत्तिकर बकाया है। इस निर्णय के साथ ही हर साल स्कूल प्रबंधन पर 45 लाख रुपये संपत्तिकर जमा करने का बोझ भी आ गया है। बीते समय से स्कूल व शिक्षण संस्थान संपत्तिकर से छूट का दावा करते रहे हैं। इस निर्णय से उस पर बहस छिड़ गई है।
2020 से चल रहा था मामला
- स्कूल का प्रकरण 2020 से कोर्ट में चल रहा था। नगर निगम की तत्कालीन आयुक्त प्रतिभा पाल ने नवंबर 2020 में स्कूल प्रबंधन को संपत्तिकर जमा करने का नोटिस जारी किया था। स्कूल प्रबंधन ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए जिला न्यायालय की शरण ली थी। स्कूल की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया था कि, उनकी बिल्डिंग का उपयोग शैक्षणिक गतिविधियों के लिए होता है, इसलिए उस पर संपत्तिकर लागू नहीं होना चाहिए। विवाद में संपत्ति के क्षेत्रफल को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आया।
- स्कूल प्रबंधन ने अपने विवरण में परिसर का क्षेत्रफल करीब 64 हजार वर्गफीट बताया है, जबकि नगर निगम की गणना में यह क्षेत्रफल करीब 3.45 लाख वर्गफीट पाया गया। केस की सुनवाई के दौरान निगम की ओर से कोर्ट में कहा गया था कि स्कूल परिसर के भीतर मौजूद खुले खेल मैदान और पार्किंग क्षेत्र भी स्कूल के उपयोग में हैं। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए करीब 2 लाख 11 हजार वर्गफीट खुले खेल क्षेत्र को भी संपत्तिकर के दायरे में माना।
गतिविधियां केवल धर्मार्थ नहीं, टैक्स फ्री मानने का आधार नहीं
- कोर्ट के अनुसार यह जमीन स्कूल की बाउंड्री के भीतर है और इसका उपयोग स्कूल के विद्यार्थी ही करते हैं। इसके अलावा स्कूल की ओर से विभिन्न गतिविधियों के लिए फीस भी ली जाती है। ऐसे में इसे पूरी तरह टैक्स फ्री मानने का आधार नहीं बनता।
- कोर्ट में नगर निगम का तर्क था कि स्कूल की गतिविधियां केवल धर्मार्थ स्वरूप की नहीं हैं और परिसर में शुल्क आधारित गतिविधियां संचालित होती हैं। इसलिए इसे संपत्तिकर से पूरी तरह मुक्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने निगम की गणना और नोटिस को सही माना। लगभग 6 साल चले केस में कोर्ट ने स्कूल की अपील को खारिज कर दिया।
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