
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर-उज्जैन के बीच हेल्थ एवं वेलनेस टूरिज्म कॉरिडोर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस योजना को लेकर शुक्रवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में स्टेकहोल्डर कंसल्टेंट वर्कशाप आयोजित की जाएगी। इसमें उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, हेल्थ कमिश्नर, आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और मेडिकल क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञ शामिल होंगे।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य इंदौर और उज्जैन को मिलाकर एक मजबूत मेडिकल हब के रूप में विकसित करना है। इस कॉरिडोर में आधुनिक एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष पद्धतियों को भी शामिल किया जाएगा। इससे मरीजों को एक ही स्थान पर समग्र चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
यह प्रोजेक्ट न सिर्फ प्रदेश के लिए, बल्कि देश के मेडिकल टूरिज्म सेक्टर के लिए भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब तक दिल्ली और मुंबई जैसे शहर मेडिकल टूरिज्म के बड़े केंद्र रहे हैं, लेकिन इस योजना के लागू होने के बाद इंदौर-उज्जैन भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं। इससे विदेशों और अन्य राज्यों से आने वाले मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार की सुविधा मिलेगी।
सरकार इस कॉरिडोर के तहत नए हेल्थ सेंटर, वेलनेस सेंटर और डायग्नोस्टिक सुविधाएं विकसित करने की योजना बना रही है। निजी अस्पतालों, होटलों और ट्रैवल सेक्टर को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि मरीजों को इलाज के साथ-साथ रहने और अन्य सुविधाएं भी आसानी से मिल सकें।
वर्कशाप में आयुष विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी मेडिकल टूरिज्म में आयुष के इंटीग्रेशन पर प्रस्तुति देंगे। वहीं मेडिकल एजुकेशन विभाग के अधिकारी मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग कर हेल्थ टूरिज्म को बढ़ावा देने पर अपने विचार रखेंगे। अंत में उपमुख्यमंत्री योजना का विस्तृत रोडमैप साझा करेंगे और सभी स्टेकहोल्डर्स से सुझाव भी लिए जाएंगे।