इंदौर के गांवों में अब प्राइवेट एजेंसी संभालेगी सफाई व्यवस्था, जीपीएस से जिला पंचायत करेगी निगरानी
इंदौर जिले के गांवों में सफाई व्यवस्था एजेंसी आधारित होगी। 332 पंचायतों और 610 से अधिक गांवों को 56 क्लस्टरों में बांटकर कचरा संग्रहण, जागरूकता और निग...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 10:57:29 AM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 10:57:29 AM (IST)
इंदौर के गांवों में अब प्राइवेट एजेंसी सफाई व्यवस्था संभालेगी। (फाइल फोटो)HighLights
- गांवों की सफाई व्यवस्था अब निजी एजेंसियों के जिम्मे होगी।
- 332 पंचायतों और 610 गांवों को क्लस्टरों में बांटेंगे।
- करीब 56 क्लस्टरों में आठ-दस गांव शामिल होंगे।
प्रेम जाट, नईदुनिया इंदौर : शहर की तर्ज पर अब गांवों की स्वच्छता व्यवस्था को भी प्रोफेशनल बनाने की तैयारी है। पंचायतों के सीमित अमले और कमजोर मानिटरिंग के कारण प्रभावित हो रही सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए जिला पंचायत नया एजेंसी आधारित स्वच्छता मॉडल लागू करने जा रही है।
इसके तहत जिले की पंचायतों और गांवों को क्लस्टर में बांटकर निजी एजेंसियों का पैनल बनाया जाएगा। एजेंसी को केवल कचरा उठाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि स्वच्छता गतिविधियां, ग्रामीणों में जागरूकता, शुल्क वसूली और व्यवस्था की निगरानी तक की जिम्मेदारी दी जाएगी।
एजेंसी आधारित होगी सफाई व्यवस्था
- दरअसल, गांवों में पंचायत के माध्यम से सफाई व्यवस्था व्यवस्थित नहीं चल पा रही थी। अमला नहीं होने से सफाई व्यवस्था कुछ ही पंचायतों में बेहतर थी, इसलिए अब इसे एजेंसी आधारित किया जा रहा है। इसमें आठ से दस गांवों को जोड़कर एक क्लस्टर बनाया जाएगा।
- आसपास वाले एक से चार क्लस्टर की जिम्मेदारी एक एजेंसी को दी जाएगी। वाहन की व्यवस्था के साथ ही सेग्रीगेशन सेंटर की व्यवस्था पंचायत और जिला पंचायत द्वारा की जाएगी। अभी कई स्थानों पर पंचायत के सीमित कर्मचारियों के कारण कचरा संग्रहण, जागरूकता और निगरानी तीनों काम एक साथ प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहे हैं।
प्रत्येक क्लस्टर में आठ से 10 गांव शामिल किए
- जिले में करीब 332 पंचायतें और 610 से अधिक गांव हैं। इन सभी को करीब 56 क्लस्टरों में बांटकर स्वच्छता व्यवस्था संचालित करने की योजना है। प्रत्येक क्लस्टर में आठ से 10 गांव शामिल किए जाएंगे। पहले से बने क्लस्टरों को ही नए माडल का आधार बनाया जाएगा। इससे अलग-अलग पंचायतों में अलग व्यवस्था लागू करने के बजाय एक एजेंसी के माध्यम से कई गांवों में एक समान प्रणाली लागू की जा सकेगी।
- नए मॉडल की खास बात यह होगी कि एजेंसी की भूमिका केवल सफाईकर्मियों की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहेगी। एजेंसी के कर्मचारी घर-घर कचरा संग्रहण, ग्रामीणों को गीला-सूखा कचरा अलग रखने के लिए प्रेरित करने, स्वच्छता संबंधी गतिविधियां चलाने और स्वच्छता शुल्क की वसूली में भी भूमिका निभाएंगे। पंचायतों की ओर से कचरा संग्रहण के लिए वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। एजेंसी इन वाहनों के संचालन और नियमित कचरा संग्रहण की व्यवस्था संभालेगी।
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वाहनों की जीपीएस से होगी निगरानी
नई व्यवस्था में तकनीक का भी इस्तेमाल होगा। कचरा संग्रहण करने वाले वाहनों में जीपीएस लगाया जाएगा। जिला पंचायत स्तर पर इसकी मानिटरिंग की जाएगी। इसके लिए निगरानी का काम संभालने वाली एजेंसी भी नियुक्त होगी, जो देखेगी कि प्रत्येक गांव में वाहन पहुंच रहा है या नहीं।
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