इंदौर के गांवों में कचरा बनेगा कमाई का जरिया, पन्नी-रेपर से तैयार होगी प्लास्टिक सीट
इंदौर के 610 से अधिक गांवों में कचरा प्रबंधन के लिए 56 क्लस्टर बनेंगे। पन्नी और रेपर से प्लास्टिक सीट तैयार कर बेची जाएगी, जिससे पंचायतों की आय बढ़ेगी...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 20 Sep 2026 01:44:54 PM (IST)Updated Date: Sun, 20 Sep 2026 01:44:54 PM (IST)
इंदौर के गांवों में कचरा बनेगा कमाई का जरिया। (एआई जनरेटेड)HighLights
- इंदौर के 610 से अधिक गांव 56 क्लस्टरों में बांटे जाएंगे।
- पन्नी और रेपर से रिसाइकिल कर प्लास्टिक सीट बनेगी।
- दो सेग्रीगेशन सेंटरों में प्लास्टिक कचरे की प्रोसेसिंग होगी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: ग्रामीण क्षेत्रों में अब पन्नी और रेपर का कचरा पंचायतों के लिए बोझ नहीं, बल्कि आय का जरिया बनेगा। जिले के 610 से अधिक गांवों में कचरा प्रबंधन को व्यवस्थित करने के लिए 56 क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। इन क्लस्टरों में एजेंसी आधारित सफाई व्यवस्था लागू की जाएगी।
प्लास्टिक कचरे से तैयार होगी सीट
- घर-घर से एकत्रित सूखे कचरे में से पन्नी और रेपर को अलग कर ग्राम बांक और काली बिल्लोद स्थित सेग्रीगेशन सेंटरों पर पहुंचाया जाएगा। यहां मशीनों के माध्यम से प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस कर प्लास्टिक सीट तैयार होगी, जिसे प्लास्टिक उद्योगों को बेचा जाएगा।
दरअसल अभी तक पन्नी और रेपर जैसे कचरे को उठवाने और निपटाने के लिए पंचायतों को राशि खर्च करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था में इसी कचरे से आय अर्जित करने की तैयारी है। इससे एक ओर पंचायतों पर आर्थिक भार कम होगा, वहीं दूसरी ओर गांवों में सफाई व्यवस्था भी बेहतर होगी। 56 क्लस्टरों में बांटे जाएंगे गांव
- जिले की करीब 332 पंचायतों और 610 से अधिक गांवों को 56 क्लस्टरों में बांटा जाएगा। प्रत्येक क्लस्टर में आठ-10 गांव शामिल होंगे।
- आसपास के एक से चार क्लस्टरों की जिम्मेदारी एक एजेंसी को दी जाएगी। एजेंसी कचरा उठाने के लिए वाहन व कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जबकि सेग्रीगेशन सेंटर की व्यवस्था पंचायत और जिला पंचायत स्तर से की जाएगी।
- जिला पंचायत सीईओ हिमांशु प्रजापति का कहना है कि कचरे का सही उपयोग किया जाएगा। एकत्र प्लास्टिक कचरे को रिसाइकल कर सीट बनाई जाएगी। इससे गांवों की सफाई के साथ राजस्व भी बढ़ेगा।
खास-खास
- 56 क्लस्टर बना 610 गांवों से एकत्रित होगा कचरा।
- दो सेंटरों में पन्नी-रेपर से बनेंगी प्लास्टिक सीट।
- पंचायतों का कचरा उठाने और निपटाने का खर्च कम होगा।
- जीपीएस से होगी वाहनों की निगरानी, हर गांव में पहुंचेंगे।
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गीला-सूखा कचरा होगा अलग
शहरों की तर्ज पर गांवों में भी गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र करेंगे। प्लास्टिक, पन्नी और रेपर को अलग कर रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा। सेग्रीगेशन सेंटरों पर मशीनें लगाई जा रही हैं। फिलहाल बांक और काली बिल्लोद में दो सेग्रीगेशन सेंटर बनाए जा रहे हैं, जहां पूरे जिले का प्लास्टिक कचरा पहुंचेगा।