
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में नर्मदा जल सप्लाई के बाद अब बोरिंग का पानी भी दूषित पाया गया है। नगर निगम की लैब जांच में बोरिंग के पानी में 'फीकल कोलिफार्म' बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई है। यह बैक्टीरिया हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारियों का कारक होता है। दरअसल, अब तक केवल नर्मदा जल सप्लाई के पानी को ही दूषित माना जा रहा था, लेकिन क्षेत्र में मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बाद जब नगर निगम ने बोरिंग के 69 सैंपल लिए, तो उनमें से 35 सैंपल फेल हो गए।
रविवार को कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि नगर निगम की मूसाखेड़ी स्थित लैब में निजी और सार्वजनिक बोरिंग के पानी की जांच करवाई गई थी। जांच में बैक्टीरिया पाए जाने का मतलब है कि क्षेत्र के नलकूपों का पानी पीना तो दूर, रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भी सुरक्षित नहीं है। ज्ञात हो कि 28 और 29 दिसंबर से ही उल्टी-दस्त के मरीज सामने आने लगे थे, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में बोरिंग के पानी का वितरण जारी रहा। तीन दिन पहले दूषित होने की आशंका के बाद नगर निगम ने इन्हें बंद करने की कार्रवाई की।
नर्मदा जल सप्लाई और बोरिंग बंद होने के बाद भागीरथपुरा में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नगर निगम पिछले आठ दिनों से टैंकरों से आपूर्ति तो कर रहा है, लेकिन यह पानी भी पीने योग्य नहीं है। रहवासी मजबूरी में इसे केवल घरेलू इस्तेमाल तक सीमित रख रहे हैं, जबकि पीने के पानी के लिए उन्हें अलग इंतजाम करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया सीवेज ओवरफ्लो, अनुपचारित सीवेज डिस्चार्ज और सेप्टिक टैंक की खराबी से जल स्रोतों में प्रवेश करते हैं। आशंका है कि ड्रेनेज चैंबरों का सीवेज अंदर ही अंदर रिसकर आसपास के बोरिंग में मिल गया। भागीरथपुरा में 600 से ज्यादा निजी और सार्वजनिक बोरिंग हैं, जिनकी पाइपलाइन पूरे क्षेत्र में बिछी हुई है। इसी कारण नर्मदा जल के साथ-साथ बोरिंग का दूषित पानी भी लोगों के घरों तक पहुंच गया।
रविवार को भी उल्टी-दस्त के 50 से ज्यादा नए मरीज सामने आए। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में 150 से अधिक मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 20 की हालत गंभीर होने पर आईसीयू में इलाज चल रहा है। पिछले आठ दिनों में तीन हजार से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण की वजह से कुछ मरीजों की किडनी बुरी तरह प्रभावित हुई है। पेट से संक्रमण किडनी तक पहुँचने के कारण इन मरीजों की स्थिति सुधारने में अधिक समय लग रहा है।
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