
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : साइबर ठगी में अब सिर्फ म्यूल बैंक खाते ही इस्तेमाल नहीं हो रहे, बल्कि खाते से आने वाले बैंकिंग ओटीपी को भी सीधे ठगों तक पहुंचाने का इंतजाम किया जा रहा है।
क्राइम ब्रांच ने ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत यूको बैंक के म्यूल खाते की जांचकर में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके जरिए देश के अलग-अलग राज्यों में हुई करीब पांच करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़ी दर्जनों शिकायतें सामने आई हैं।
डीसीपी (अपराध) राजेश त्रिपाठी के अनुसार कार्रवाई यूको बैंक की महू शाखा से जुड़े खाते को लेकर की गई। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान दीपक राव निवासी महू और गौरव राठौर निवासी लसूड़िया क्षेत्र के रूप में हुई है। आरोपितों के कब्जे से चार मोबाइल, आठ एक्टिव सिम, 10 बैंक पासबुक और 11 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं।
डीसीपी के अनुसार संदिग्ध खाते में लेन-देन की बड़ी रकम सामने आई। उसके विरुद्ध तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, गोवा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और बिहार में पांच करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज है। पुलिस के अनुसार दीपक राव ने अपना खाता म्यूल अकाउंट के तौर पर उपलब्ध कराया था। इसके साथ ही खाते में बैंक ओटीपी प्राप्त करने के लिए उसके नाम पर जारी सिम भी गौरव राठौर को दी गई।
पूछताछ में साइबर ठगी के एक ऐसे तरीके के बारे में बताया, जिसमें विशेष ओटीपी ऐप का इस्तेमाल हो रहा था। पुलिस के मुताबिक आरोपित ने एप रिलिज और सोल्यूशन एसएमएस,ड्रीम पे जैसे ऐप के इस्तेमाल की जानकारी दी है। इनकी एपीके फाइल विदेशी आपरेटर से मिलने की बात पूछताछ में सामने आई है।
जिस मोबाइल में संबंधित बैंक खाते की सिम लगी होती थी, उसी फोन में ऐप संचालित किया जाता था। ऐप का सर्वर आनलाइन या ‘ग्रीन’ होने के दौरान बैंकिंग ट्रांजेक्शन के लिए आने वाले ओटीपी को कथित तौर पर संबंधित आपरेटर तक पहुंचाया जाता था। प्रत्येक बैंक खाते के लिए अलग आइडी का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपित इंटरनेट बैंकिंग के जरिए खातों का स्टेटमेंट और ट्रांजेक्शन भी चेक करता था। पुलिस के अनुसार, गेमिंग से संबंधित भुगतान के लिए मर्चेंट क्यूआर कोड के इस्तेमाल होता था।
एक अन्य चौंकाने वाला दावा सिटी यूनियन बैंक के कुछ खातों को लेकर सामने आया। आरोपित ने बताया कि कुछ खातों में हर ट्रांजेक्शन के लिए ओटीपी की जरूरत नहीं होती थी। इसके लिए शुरुआत में ई-टोकन और साफ्ट टोकन जनरेट किए जाने की बात कही गई है।
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार पूछताछ में बैंक खातों की संपूर्ण जानकारी (खाता नंबर, आईएफएससी कोड, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग लोगिन डिटेल्स और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर जैसी जानकारी हासिल कर टेलीग्राम के माध्यम से कथित तौर पर विदेशी आपरेटरों तक पहुंचाने की बात सामने आई है। आरोपित ने करीब चार कंपनियों के संपर्क में होने और प्रत्येक में आठ से दस एजेंट के काम करने की जानकारी भी दी है।
अब क्राइम ब्रांच इन कंपनियों, टेलीग्राम चैनल-ग्रुप, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड और विदेशी आपरेटरों के बीच कनेक्शन खंगाल रही है।
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