इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज प्रबंधन को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने जमीन विवाद में कलेक्टर के नोटिस में हस्तक्षेप से किया इंकार
कॉलेज का उपयोग भी अत्यंत कम जमीन पर हो रहा है। इस तरह भूमि के मूल उद्देश्य के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों की योजना बनाई जा रही है। इसके बाद कलेक्टर न ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 08 Jan 2026 09:03:33 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Jan 2026 09:08:37 PM (IST)
इंदौर का क्रिश्चियन कॉलेज।नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। क्रिश्चियन कॉलेज जमीन विवाद में कॉलेज प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज प्रबंधन की याचिका निराकृत करते हुए स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट में जिस कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी गई थी, उस पर कलेक्टर कानून के अनुसार फैसला लेंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद तय हो गया है कि कॉलेज प्रबंधन को कलेक्टर के समक्ष पेश होकर जवाब देना होगा।
यह है पूरा मामला
- इंदौर कस्बे के खसरा नंबर 407/1669/3 की कुल 68.303 हेक्टेयर भूमि में से 1.702 हेक्टेयर भूमि पर क्रिश्चियन कॉलेज स्थित है। कॉलेज प्रबंधन ने एक नक्शा स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया था। इसमें कॉलेज परिसर की जमीन पर व्यावसायिक कार्यालय, दुकानें और अन्य निर्माण प्रस्तावित थे।
नक्शा प्रस्तुत करने की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने पूरी जमीन की जांच कराई। इसमें पता चला कि यह जमीन वर्ष 1887 में होलकर रियासत के समय महारानी भागीरथीबाई द्वारा कैनेडियन मिशन को महिला अस्पताल और स्कूल के संचालन के उद्देश्य से दी गई थी।
साथ ही यह शर्त भी लगाई थी कि जब तक जमीन का उपयोग अस्पताल और स्कूल के लिए किया जाएगा, तब तक यह चर्च के पास रहेगी। उपयोग बंद होने पर जमीन वापस लेने का अधिकार महाराजा के उत्तराधिकारियों के पास रहेगा।
प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई कि उक्त जमीन पर शर्तों के अनुसार महिला अस्पताल संचालित नहीं हो रहा है। कॉलेज का उपयोग भी अत्यंत कम जमीन पर हो रहा है।
इस तरह भूमि के मूल उद्देश्य के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों की योजना बनाई जा रही है। इसके बाद कलेक्टर ने न केवल प्रस्तावित नक्शे पर रोक लगाई, बल्कि भूमि को वापस लेने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की और कालेज प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली थी
कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस को चुनौती देते हुए कॉलेज प्रबंधन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन कालेज प्रबंधन को राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि कलेक्टर द्वारा जारी पत्र सिर्फ नोटिस है, न कि अंतिम आदेश। कॉलेज प्रबंधन के पास अवसर है कि वह कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखे। हाई कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए कॉलेज प्रबंंधन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, लेकिन उसे वहां भी राहत नहीं मिली।