इंदौर के ई-नगर पालिका पोर्टल में 60 दिन से पुराना रिकॉर्ड नहीं, नामांतरण घोटाले में जिस आईपी एड्रेस से हुआ फर्जीवाड़ा, उसे ट्रेस करना कठिन
नगर निगम के बहुचर्चित नामांतरण घोटाले की साइबर जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई है। मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीस...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 09:20:25 AM (IST)Updated Date: Sun, 26 Jul 2026 09:20:25 AM (IST)
ई-पोर्टल से हटा रिकॉर्ड, फर्जीवाड़ा ट्रेस करना मुश्किल। (एआई इमेज)HighLights
- दो साइबर विशेषज्ञों की टीम ने तीन दिन की जांच के बाद प्राथमिक रिपोर्ट सौंप दी है
- राज्य सरकार के 'ई-नगर पालिका' पोर्टल पर 60 से 90 दिन से ज्यादा का वर्किंग रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रहता है
- जिस कंप्यूटर और आईपी एड्रेस से इसे अंजाम दिया गया था, उसे चिह्नित कर पाना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नगर निगम के बहुचर्चित नामांतरण घोटाले की साइबर जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई है। मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार के 'ई-नगर पालिका' पोर्टल पर 60 से 90 दिन से ज्यादा का वर्किंग रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रहता है।
चूंकि यह फर्जीवाड़ा इस समय सीमा से पुराना है, इसलिए जिस कंप्यूटर और आईपी एड्रेस से इसे अंजाम दिया गया था, उसे चिह्नित कर पाना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के मुताबिक दो साइबर विशेषज्ञों की टीम ने तीन दिन की जांच के बाद प्राथमिक रिपोर्ट सौंप दी है। अब अधिकारियों ने उनसे विस्तृत रिपोर्ट जल्द देने को कहा है।
फायरवॉल लॉग न होने से कम्प्यूटर ट्रेस करना हुआ मुश्किल
साइबर एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट में नगर निगम के डिजिटल सिस्टम की गंभीर कमियां उजागर हुई हैं-
- लॉग-इन/आउट पासवर्ड चिह्नित, पर आईपी नहीं : जांच में पता चला कि किस पासवर्ड से सिस्टम में लॉग-इन और लॉग-आउट किया गया, लेकिन सटीक आईपी एड्रेस का पता नहीं चल रहा।
- फायरवॉल सुरक्षा की कमी : हर सिस्टम में इंटरनल और एक्सटर्नल दो आईपी एड्रेस होते हैं। यदि सिस्टम में 'फायरवॉल लॉग' सक्रिय हो, तभी आईपी एड्रेस को ट्रेस किया जा सकता है। इंदौर निगम के सिस्टम में यह लॉक/लॉग मौजूद नहीं था, जिसके कारण सिस्टम को ट्रेस करना मुश्किल हो गया है।
- वर्किंग रिकॉर्ड की सीमा : आमतौर पर किसी पोर्टल में 89 से 120 दिन का ही वर्किंग रिकॉर्ड रहता है। इस पोर्टल पर पुराना बैकअप न होने से दोषियों को पोर्टल के जरिये पकड़ना मुश्किल साबित हो रहा है।
- दलालों का नेटवर्क आया सामने : घोटाले की जांच के लिए अपर आयुक्त आकाश सिंह, अर्थ जैन और दरबाई की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। कमेटी इस समय 356 फर्जी नामांतरणों में से बेची गई 51 संपत्तियों के खरीदारों से पूछताछ कर रही है।