नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : मध्य प्रदेश ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में लंबी छलांग लगाई है। नीति आयोग की पहली इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स-2026 में प्रदेश देश में सातवें और बड़े राज्यों के बीच पांचवें स्थान पर पहुंच गया।
प्राकृतिक संसाधन, उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियां और संस्थागत सुधारों ने प्रदेश को निवेशकों की पसंद बनाया है लेकिन इसी रिपोर्ट ने भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती की ओर भी संकेत किया है। रिपोर्ट कहती है कि यदि मध्य प्रदेश को निवेश की अगली छलांग लगानी है तो अब उसे जमीन और संसाधनों से आगे बढ़कर नवाचार (इनोवेशन) और पेटेंट आधारित अर्थव्यवस्था तैयार करनी होगी।
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्ष 2021 में जहां 540 स्टार्टअप पंजीकृत थे, वहीं वर्ष 2023 तक उनकी संख्या बढ़कर 1,264 हो गई। इसके बावजूद प्रति लाख आबादी पर इनक्यूबेटर बड़े राज्यों के औसत से 53 प्रतिशत कम हैं और पेटेंट आवेदन भी औसत से 48 प्रतिशत नीचे हैं। यानी नए उद्यम तो शुरू हो रहे हैं, लेकिन उनमें से बड़ी संख्या अभी ऐसे उत्पाद या तकनीक विकसित नहीं कर पा रही है, जिन्हें पेटेंट में बदला जा सके।
इसकी पुष्टि केंद्र सरकार के ताजा आंकड़े भी करते हैं। राज्यसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश से पेटेंट आवेदन लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2021 में 436 आवेदन हुए थे। इसके बाद 2022 में 624, 2023 में 728, वर्ष 2024 में 790 और 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,346 तक पहुंच गई। यानी पांच वर्षों में पेटेंट आवेदन तीन गुना से अधिक हुए हैं लेकिन राष्ट्रीय स्तर के औसत के मुकाबले यह काफी कम है। वर्ष 2025 में तमिलनाडु से 21,104, कर्नाटक से 10,838, महाराष्ट्र से 10,552, उत्तर प्रदेश से 7,610 और तेलंगाना से 6,828 पेटेंट आवेदन दर्ज हुए, जबकि मध्य प्रदेश 1,346 आवेदनों के साथ इन राज्यों से काफी पीछे है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि निवेश की प्रतिस्पर्धा अब केवल उद्योग लगाने तक सीमित नहीं रह गई है। वैश्विक कंपनियां ऐसे राज्यों को प्राथमिकता देती हैं, जहां शोध, तकनीक और बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी) का मजबूत आधार हो। पेटेंट किसी नए आविष्कार का कानूनी अधिकार भर नहीं, बल्कि उच्च मूल्य वाले उद्योग, तकनीकी निर्यात और बेहतर रोजगार का आधार भी होते हैं। यही कारण है कि नीति आयोग ने पहली ही रिपोर्ट में इनोवेशन इकोसिस्टम को प्रदेश की सबसे बड़ी सुधार योग्य चुनौती के रूप में रेखांकित किया है। प्रदेश ने निवेश के लिए मजबूत आधार तैयार कर लिया है। अब यदि विश्वविद्यालयों, उद्योगों और स्टार्टअप को जोड़कर शोध से बाजार तक की श्रृंखला मजबूत की जाती है, तो अगले कुछ वर्षों में प्रदेश निवेश के साथ-साथ नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी राज्यों की कतार में शामिल हो सकता है।
इंदौर बन सकता है प्रदेश की इनोवेशन कैपिटल
मध्य प्रदेश की इस चुनौती का सबसे बड़ा समाधान इंदौर के पास दिखाई देता है। प्रदेश का सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम, आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर, पीथमपुर का आटोमोबाइल क्लस्टर, तेजी से बढ़ता फार्मा उद्योग और आईटी सेक्टर - ये सभी नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बन सकते हैं।