• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

जीएसटी लागू होने के आठ साल बाद भी पोर्टल में परेशानियां, त्रुटि सुधार पर भी मांगा जा रहा ब्याज

GST Portal: एमपी टैक्स लॉ बार एसोसिएशन (एमपीटीएलबी) और कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिनर्स एसोसिएशन (सीटीपीए) ने ज्ञापन सौंपकर पोर्टल में सुधार की मांग की है।

By Lokesh SolankiEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 07 Oct 2026 09:46:52 AM (IST)Updated Date: Wed, 07 Oct 2026 10:07:07 AM (IST)
जीएसटी लागू होने के आठ साल बाद भी पोर्टल में परेशानियां, त्रुटि सुधार पर भी मांगा जा रहा ब्याज

HighLights

  1. व्यापारी के खाते में एडवांस में आईटीसी जमा होने पर भी उससे ब्याज वसूली की जा रही
  2. सरकार के खजाने में पहले से जमा क्रेडिट से टैक्स समायोजित है
  3. संगठनों ने पोर्टल में ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करने की मांग की है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जीएसटी लागू होने के आठ साल बाद भी पोर्टल की परेशानियां दूर नहीं हो सकी हैं। जीएसटी काउंसिल की होने वाली बैठक से पहले प्रदेश के कर विशेषज्ञों ने पोर्टल की समस्याओं के खिलाफ मोर्चा खोला है।

प्रदेश के जीएसटी कमिश्नर को लिखित ज्ञापन सौंपकर कहा गया है कि रिटर्न में पूरा टैक्स भरा गया, लेकिन एंट्री में शब्दों की गलती के सुधार पर भी पोर्टल ब्याज की मांग निकाल रहा है। साथ ही व्यापारी के खाते में एडवांस में आईटीसी जमा होने पर भी उससे ब्याज वसूली की जा रही है।


एमपी टैक्स लॉ बार एसोसिएशन (एमपीटीएलबी) और कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिनर्स एसोसिएशन (सीटीपीए) ने ज्ञापन सौंपकर पोर्टल में सुधार की मांग की है। टैक्स ला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन लखोटिया ने बताया कि कई मामलों में करदाता की त्रुटि केवल रिटर्न में शाब्दिक जानकारी दर्ज करने से जुड़ी होती है, जबकि टैक्स का भुगतान समय पर हो चुका होता है।

आईटीसी के बाद ब्याज क्यों

एसोसिएशनों ने बताया कि किसी अवधि में टैक्स देयता का भुगतान छूट गया, लेकिन बाद में टैक्स जमा किया गया। यदि इस पूरी अवधि के दौरान करदाता के इलेक्ट्रानिक क्रेडिट लेजर में पर्याप्त आईटीसी उपलब्ध था तो टैक्स का भुगतान उस क्रेडिट से किया जा सकता था। सरकार के खजाने में पहले से जमा क्रेडिट से टैक्स समायोजित है। ऐसे में वास्तविक रूप से नकद भुगतान की जरूरत नहीं होती।

इसके बावजूद पोर्टल धारा 50 के तहत ब्याज की गणना कर देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब संबंधित अवधि में पर्याप्त आईटीसी उपलब्ध था और राजस्व को वास्तविक नुकसान नहीं हुआ तो उस सीमा तक ब्याज नहीं लगना चाहिए।

दोनों संगठनों ने पोर्टल में ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करने की मांग की है, जिसमें वास्तविक कर भुगतान में देरी और केवल रिटर्न सुधार के मामलों में अंतर किया जा सके। इससे करदाताओं पर अनावश्यक ब्याज का बोझ कम होगा और जीएसटी प्रणाली अधिक व्यावहारिक बनेगी।

यह भी पढ़ें- जीएसटी रिटर्न भरने की आखिरी डेट और दीपावली एक साथ, व्यापार करें या रिटर्न की चिंता