ITI मूक-बधिर छात्रों के साथ हो रहा अन्याय, बोले- हमारा हो रहा शोषण; हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश
इंदौर में मूक-बधिर बच्चों ने आइटीआइ में उनके साथ हो रहे कथित शोषण और अनियमितताओं को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिक ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 14 Jan 2026 08:13:25 AM (IST)Updated Date: Wed, 14 Jan 2026 08:13:25 AM (IST)
मूक-बधिर बच्चों के साथ हो रहा अन्याय। (फाइल फोटो)HighLights
- मूक-बधिर बच्चों ने आइटीआइ में दुर्व्यवहार की शिकायत की।
- दान का सामान संस्थान कर्मी अपने पास रखने का आरोप।
- 2023 से स्टाइफंड और लैपटॉप योजना लागू नहीं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मूक-बधिर बच्चों ने हाई कोर्ट में एक याचिका प्रस्तुत कर आइटीआइ में उनके साथ हो रहे व्यवहार की शिकायत की है। याचिका के साथ बच्चों द्वारा हाथ से लिखे गए कुछ पत्र भी संलग्न किए गए हैं, जो उन्होंने कलेक्टर और प्राचार्य (आइटीआइ) को लिखे हैं। इसमें उन्होंने उनके साथ हो रहे गलत व्यवहार की बात रखी है।
कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव से कहा है कि वह खुद आइटीआइ का निरीक्षण करें और बच्चों से मिलकर उनकी समस्याओं को समझें। तीन फरवरी तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
अभिभाषक शन्नो शगुफ्ता खान के मुताबिक आइटीआइ में पढ़ने वाले मूक-बधिर बच्चों द्वारा लगातार शिकायतें की जा रही थीं। उनका कहना है कि उनके लिए दान में जो सामान आता है, उसे संस्थान से जुड़े लोग स्वयं रख लेते हैं। बाद में इसी सामान के लिए बच्चों से पैसे मांगे जाते हैं। बच्चों को 2023 से स्टाइफंड भी नहीं मिल रहा।
शासन की बच्चों को लैपटाप देने की योजना का पालन भी नहीं हो रहा। होस्टल में रहकर आइटीआइ की पढ़ाई करने वाले बच्चों से बर्तन धुलवाए जाते हैं, बगीचे का काम करवाया जाता है। मूक-बधिर बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई मूक-बधिर शिक्षक या दुभाषिया भी नहीं है।
एडवोकेट खान ने कोर्ट को बताया कि मामले की शिकायत कलेक्टर से भी हुई थी। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने दौरा किया था। छात्रों को एसडीएम के सामने अपनी बात रखने से रोका गया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव से निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।