
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : इंदौर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित कालाकुंड प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और पारंपरिक कलाकंद मिठाई के लिए प्रसिद्ध है। अब इसे वीकेंड पिकनिक और जंगल कैंपिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एमपीआरआरडीए) ने यहां करीब 10 किलोमीटर लंबी बारहमासी सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है। चोरल नदी पर चार ब्रिज बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ आसपास के आदिवासी गांवों का संपर्क भी सालभर बना रहेगा।

कालाकुंड जाने के लिए सड़क तैयार। -नईदुनिया
विंध्याचल पर्वत श्रेणी की पहाड़ियों के बीच बसे इस क्षेत्र के सात से आठ आदिवासी गांवों में 20 से अधिक होम स्टे हैं। पर्यटक यहां ग्रामीण जीवन और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव लेने पहुंचते हैं। फिलहाल पातालपानी से हेरिटेज ट्रेन के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है, लेकिन बारिश में चोरल नदी का जलस्तर बढ़ने से सड़क मार्ग बाधित हो जाता है। इससे पर्यटकों के साथ ग्रामीणों को भी परेशानी होती है।
30 मई को कलेक्टर शिवम वर्मा ने कालाकुंड में रात्रि चौपाल लगाई थी। इस दौरान ग्रामीणों ने नदी पर ब्रिज बनाने की मांग रखी थी। एमपीआरआरडीए के महाप्रबंधक लोकेंद्र मंडलोई के अनुसार घने जंगलों और वन औषधियों को सुरक्षित रखते हुए सड़क निर्माण पूरा हो चुका है। चार ब्रिजों के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसी वर्ष काम शुरू होने की संभावना है।
कालाकुंड में पशुपालक गाय और भैंस के शुद्ध दूध से पारंपरिक तरीके से कम शक्कर वाली दानेदार कलाकंद मिठाई बनाते हैं। यह यहां का खास आकर्षण है। सड़क और ब्रिज बनने से पर्यटकों को निजी वाहनों से पहुंचने में सुविधा होगी। साथ ही क्षेत्र में स्थित संभागीय स्काउट-गाइड कैंपिंग केंद्र का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
ब्रिज बनने से पहाड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों को स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और राशन दुकानों तक पहुंचने में आसानी होगी। बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।