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इंदौर-खंडवा-इच्छापुर राजमार्ग पर बन रही तीन आधुनिक सुरंगें, जनवरी से शुरू होगी तीन लेन की आवाजाही

अधिकारियों के मुताबिक तेजाजी नगर से बलवाड़ा के बीच बनने वाली ये सुरंगें भेरूघाट, चोरल घाट और बाईग्राण क्षेत्र में बन रही हैं। इनका लगभग 88 प्रतिशत काम...और पढ़ें

By Kapil NileyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 06:44:05 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 06:44:05 PM (IST)
इंदौर-खंडवा-इच्छापुर राजमार्ग पर बन रही तीन आधुनिक सुरंगें, जनवरी से शुरू होगी तीन लेन की आवाजाही
इंदौर-खंडवा-इच्छापुर राजमार्ग पर बन रही तीन आधुनिक सुरंगें

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर-खंडवा-इच्छापुर राजमार्ग का सफर को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए तीन आधुनिक तकनीक से तीन सुरंग बनाई जा रही है। इसका काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। मगर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दिसंबर की डेडलाइन रखी है, लेकिन समयावधि में निर्माण कार्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। कारण यह है कि एजेंसी ने निर्माण के दौरान कई बाधाएं आना बताया है। इस वजह से जनवरी तक तीनों सुरंगों के एक हिस्से से वाहनों की आवाजाही शुरू की जाएगी।

अधिकारियों के मुताबिक तेजाजी नगर से बलवाड़ा के बीच बनने वाली ये सुरंगें भेरूघाट, चोरल घाट और बाईग्राण क्षेत्र में बन रही हैं। इनका लगभग 88 प्रतिशत काम पूरा किया गया है। 216 किमी इस राजमार्ग को बनाने में 900 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। तेजाजी नगर से सिमरोल का हिस्सा बन चुका है। इन दिनों डिवाइडर और संकेतक लगाए जा रहे हैं। जबकि सुरंगों के भीतर निर्माण अभी जारी है।


न्यू आस्ट्रियन तकनीक से पहाड़ काटकर बनाई जा रही हैं सुरंगें

सुरंगों के निर्माण में न्यू आस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें नियंत्रित ब्लास्टिंग और मशीनों की मदद से पहाड़ के भीतर रास्ता बनाया है। खुदाई के तुरंत बाद चट्टानों को मजबूती देने के लिए स्टील के सरिये और विशेष कंक्रीट का उपयोग किया गया है। इससे पहाड़ के हिस्से टूटकर गिरने का खतरा कम होता है। वैसे इन दिनों सुरंगों के भीतर पानी रिसने से रोकने के लिए वाटरप्रूफिंग की व्यवस्था की जा रही है। वहीं पर्याप्त रोशनी, वेंटिलेशन और अन्य सुरक्षा सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है।

तीन सुरंगें-वायडक्ट से घटेगी 10 किमी की दूरी

राजमार्ग पर तीन सुरंग और वायडक्ट का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 575 भेरूघाट, 550 चोरल घाट और 480 मीटर बाइग्राम सुरंग है। ट्विन टनल व्यवस्था में आने-जाने के लिए तीन-तीन लेन बनाई गई है। खासबात यह है कि इन सुरंग और वायडक्ट से दस किमी का सफर कम होगा। मेघा इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेश्वर राव के मुताबिक जनवरी तक तीन सुरंगों का एक हिस्सा यानी तीन लेन वाहनों की आवाजाही के लिए खोला जाएगा, जिसमें वाहन वायडक्ट से भी निकल सकेंगे।

अवैध आवाजाही बनी चुनौती: बैरिकेड्स हटाकर घुस रहे वाहन

राजमार्ग से भले ही वाहन निकल रहे हैं, लेकिन सुरंग में निर्माण कार्य चल रहा है। इसके चलते एजेंसी ने वाहनों का प्रवेश बंद कर रखा है। बावजूद इसके लोग सुरंग से निकल रहे हैं। जबकि एजेंसी द्वारा बैरिकेड्स और गेट बनाए गए हैं। मगर लोग इन्हें हटाकर वाहन निकाल रहे हैं। इस संबंध में एजेंसी ने पुलिस और प्रशासन को जानकारी दे दी है, लेकिन अभी तक जिम्मेदारों ने इसकी तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया है।

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