
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। क्या कभी आपने शहर के पास ऐसा स्थान देखा है जहां प्रकृति का सौंदर्य, आस्था का सागर, रोमांच का साथ और रहस्य को जानने की उत्सुकता हो। वह स्थान जहां भक्त भी पहुंचते हैं और सैर-सपाटे के शौकीन भी। जहां निर्मल नदी भी बहती है और विशाल पहाड़ भी हैं। जहां गांव भी बसा है और निर्जन वन भी। कच्चे-पक्के घर भी बने हैं तो लंबी गुफा भी है।
और तो और यह स्थान शहर से बहुत दूर भी नहीं है तो ज्यादा नजदीक भी नहीं। मतलब रहस्य, रोमांच और आस्था का यहां अद्भुत संगम है जो पर्यटन प्रेमियों के आनंद को कई गुना बढ़ा देता है।
शहर से करीब 60 किमी दूर कृतेश्वर महादेव गुफा एक ऐसा स्थान है जहां इस बार आप दोस्तों, परिवार के साथ पिकनिक पर जा सकते हैं। यूं तो यहां वर्षभर में कभी भी जाया जा सकता है पर वर्षा के शुरुआती दौर व सर्दी के मौसम में यहां का सौंदर्य और निखर उठता है। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है यह स्थान भगवान शिव को समर्पित है।
यह स्थान शहर से करीब 60 किमी दूर है। यहां जाने के लिए आपको खंडवारोड की ओर रुख करना होगा। सिमरोल, चोरल पार करने के बाद बलवाड़ा गांव आता है। इस गांव से एक-दो किमी आगे बायीं ओर मुड़ना होगा। यह रास्ता आपको रामकुला गांव लेकर जाएगा। रामकुला गांव से दो-तीन किमी दूर कृतेश्वर महादेव गुफा बनी हुई है।
ट्रैवल टेल्स इंदौर के सीए मयंक घाटिया बताते हैं कि इस स्थान की दूरी शहर से करीब 60 किमी है पर रास्ता इतना खूबसूरत है कि सफर कब पूरा हो जाता है पता ही नहीं चलता। कृतेश्वर महादेव गुफा किसने और कब बनाई इसका कोई प्रमाण यहां नहीं है। गुफा में शिवलिंग स्थापित है। गुफा करीब 100 फीट लंबी है पर इसमें प्रवेश झुककर या घुटने के बल बैठकर ही किया जा सकता है।
इस गुफा तक पहुंचने के लिए करीब एक किमी तक आपको पैदल जाना होगा। यही नहीं रामकुला गांव और गुफा के बीच एक नदी भी है जिसे पैदल ही पार करना होता है। नदी को पार करना और कच्चे रास्ते से होकर गुफा तक पहुंचना रोमांच को और भी बढ़ा देता है। वैसे गुफा तक जाने के लिए स्थानीय नागरिकों की मदद जरूर लें क्योंकि आप नहीं जानते कि नदी कहां गहरी है, कब बहाव बढ़ेगा और कौन सा रास्ता सही है।
यही नहीं यहां बंदर भी बहुत हैं इसलिए थोड़ी सावधानी रखें। मानसून में यहां सांप आदि का अंदेशा भी बना रहता है इसलिए लांग बूट पहनकर जाना ही बेहतर होगा और सावधानी से चलें। यदि आसपास के क्षेत्र में बरसात तेज हो रही है तो यहां नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। यदि पानी का रंग अपेक्षाकृत मटमैला होता दिखे और बहाव भी तेज होने लगे तो समझ जाएं कि नदी पार नहीं करना है।
वैसे गांव में आपको चाय आदि तो मिल जाएगी पर यदि आप यह सोचकर आएं हैं कि खाना भी यहीं खाएंगे तो इसके लिए आपको अपनी तैयारी करके आना होगा। यदि कोई ग्रामीण तैयार हो जाए तो आप उससे भी भोजन बनवा सकते हैं। बेहतर यही होगा कि आप अपना भोजन स्वयं ही लेकर जाए।
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