
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सिंहस्थ के लिए जमीन अधिग्रहण का मामला फिर हाई कोर्ट पहुंच गया है। हाई कोर्ट में प्रस्तुत याचिका में सड़क चौड़ीकरण के लिए निगम द्वारा निर्माण हटाने और जमीन नगर निगम की घोषित करने को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए उज्जैन नगर निगम और राज्य शासन से जवाब मांगा है।
हाई कोर्ट में प्रस्तुत इस याचिका में कहा गया है कि केंद्र शासन द्वारा 13 वर्ष पहले पारित भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद राज्य शासन के मप्र नगर निगम एक्ट की धारा 305 का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।
इस धारा के अंतर्गत नगर निगम को सड़क बनाने में बाधक निर्माण हटाने के साथ ही उस जमीन का आधिपत्य भी मिल जाता है, जबकि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत इसके लिए दावे-आपत्ति बुलाकर मुआवजा तय करने की प्रक्रिया होती है। जबकि नगर निगम एक्ट में ऐसा नहीं है। सिर्फ नोटिस के जरिए ही प्रक्रिया पूरी हो जाती है। दोनों नियम एक-दूसरे के विपरीत हैं।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही सुभदा वाघमारे मामले में इस विषय को तय कर चुकी है तो फिर कोर्ट इस मामले में दोबारा सुनवाई कैसे कर सकती है। इस पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सुभदा वाघमारे प्रकरण में जब याचिका दायर हुई थी, उस समय केंद्र शासन का कानून लागू नहीं हुआ था।