
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : शराब के ठेकों की महंगी बोली और ड्यूटी बचाने के लिए ठेकेदार शराब तस्करी कर रहे है। इंदौर हाईवे से रोजाना दस से ज्यादा ट्रक गुजरते हैं। शराब की बड़ी खेप आलीराजपुर और झाबुआ के रास्ते गुजरात तक पहुंचाई जाती है। तस्करी में ठेकेदारों के साथ नेताओं का गठजोड़ भी है, जो सीमा पार का काम ठेका लेता है।
शराब तस्करी के इस नेटवर्क का तरीका भी चौंकाने वाला है। कई बार ट्रकों के साथ फर्जी बिल्टी भेजी जाती है और कईं बार कभी परचून या दूसरे सामान की आड़ में शराब की खेप रवाना की जाती है। ठेकेदार चालक को फर्जी सिमकार्ड देता और उससे सिर्फ वर्चुअल काल लगाता है।
चालक निश्चित स्थान पर पहुंच जाता और वहां उससे दूसरा चालक ट्रक लेकर रवाना हो जाता है। दोनों को आपस में बात करने की मनाही होती है और उनके पास एक दूसरे के नंबर तक नहीं होते है। दिलचस्प बात यह ठेकेदार के आदमी ट्रक के आगे बाकायदा पेट्रोलिंग करते चलते है।
शराब कारोबार से जुड़े लोगों के बीच यह चर्चा है कि कई ठेकेदारों ने दुकानें महंगी कीमत पर ली हैं। अपेक्षित बिक्री न होने पर अवैध सप्लाई का रास्ता अपनाते है। आलीराजपुरा के अलपेश,प्रदीप चौहान,चंदर चौहान और बाबू के माध्यम से शराब के ट्रक गुजरात भेजे जाते है। कईं तस्कर पहले ठेकेदारों की नौकरी करते थे। शराब के ट्रक पार करवा कर अब करोड़ों का कारोबार करने लगे है।
शराब तस्करी में सिंडिकेट काम करता है जो बाकायदा आबकारी और पुलिस अफसरों से भी सेटिंग रखता है। रोजाना इतनी बड़ी संख्या में ट्रक हाईवे से गुजर जाते है और अफसर परिवहन, बिल्टी, माल और दस्तावेजों की जांच नहीं करते है।
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