
विशाल राठौर.इंदौर
ट्रैफिक जाम का कारण बनी पुरानी लोहा मंडी को शिफ्ट करने की प्रक्रिया व्यापारियों और इंदौर विकास प्राधिकरण के बीच खींचतान का कारण बन गई है। एक ओर प्राधिकरण के अधिकारियों ने व्यापारियों को लीज निरस्त कर प्लॉट पर कब्जा लेने के नोटिस दे डाले हैं वहीं मोहलत नहीं मिलने पर व्यापारी कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं। सालों बाद भी मंडी शिफ्ट नहीं की जा सकी, जिसके कारण पुरानी मंडी के बढ़ते ट्रैफिक से लोगों को परेशानी झेलना पड़ रही है।
जूनी इंदौर क्षेत्र में चल रही लोहा मंडी सालों से हर रोज हजारों लोगों की परेशानियों का कारण बन रही है। भारी वाहनों के आने-जाने और घंटों तक खड़े रहने के कारण इस क्षेत्र से लोगों का निकलना भी चुनौती भरा काम होता है, लेकिन प्रशासन है कि 2006 में जमीन आंवटन होने के बाद भी इस मंडी को नई मंडी में शिफ्ट नहीं करवा पाया। आठ साल बाद भी मंडी को शिफ्ट कराने की कवायद व्यापारियों और प्राधिकरण अधिकारियों के बीच विवाद का कारण बन रही है।
यह है कहानी
मंडी में भारी वाहनों के आवागमन के कारण मंडी को देवास रोड पर स्कीम 78 में शिफ्ट करने की योजना बनाई गई और 2006 में इंदौर लोहा व्यापारी एसोसिएशन के 323 सदस्यों को प्लॉट लीज पर दिए गए। ये प्लॉट इस शर्त पर इन्हें लीज पर दिए गए थे कि जल्द ही इन्हें अपना व्यवसाय पुरानी मंडी से नई मंडी में शिफ्ट करना होगा। इसके लिए प्राधिकरण की ओर से व्यापारियों को अलग-अलग समय पर छह बार नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन आज तक ऐसा नहीं हो सका। 220 व्यापारियों द्वारा दुकानों का निर्माण कार्य अब करवाया जा रहा है जबकि 89 ऐसे हैं जिन्होंने काम भी शुरू नहीं करवाया है। इन्हें 30 जून तक काम पूरा करवाकर दुकान शिफ्ट करने को कहा गया है अन्यथा 1 जुलाई को अधिकारियों का दल जांच करेगा और व्यापारियों से दुकानों का कब्जा ले लिया जाएगा। मंडी शिफ्ट नहीं होने के पीछे दोनों पक्ष एक दूजे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
निगम और आईडीए की खींचतान में लोगों को मिल रही सजा
इस पूरी कहानी में सबसे हैरत की बात यह है कि व्यापारियों को प्लॉट तो 2006 में ही दे दिए गए थे, लेकिन निर्माण के लिए निगम की ओर से नक्शा ही पास नहीं हुआ। दिसंबर 2012 में नक्शा पास करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई। अब तक गिनती के व्यापारी ही निर्माण कार्य करवाकर वहां शिफ्ट हो पाए हैं। नक्शे पास नहीं होने के पीछे एसोसिएशन और प्राधिकरण के अधिकारी दोनों कह रहे हैं कि यह निगम और प्राधिकरण के बीच की खींचतान का नतीजा है जिसके चलते व्यापारियों को निर्माण के लिए नक्शे पास ही नहीं करवाए गए। कई बार कोशिश के बाद भी वहां नक्शे पास नहीं हुए। वहां निर्माण नहीं हो पाए और यहां पुरानी मंडी में ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ती जा रही है। इस तरह आपसी खींचतान की सजा लोगों को मिल रही है।
हर साल लीज और संपत्ति कर फिर भी सुविधा नहीं
एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक जिन लोगों को प्लॉट मिले हैं नक्शा पास होने में देरी के बावजूद उनका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन निगम और आईडीए की बेरूखी के कारण व्यापारी शिफ्ट नहीं कर पा रहे हैं। अध्यक्ष ईशाक चौधरी ने बताया कि 2006 से जमीन आवंटित होते ही सभी व्यापारी 3486 रुपए प्रति प्लॉट, प्रति साल लीज भर रहे हैं। संपत्ति कर भी तभी से भरा जा रहा है, लेकिन आज भी सुविधा और सुरक्षा नहीं है। वहां पूरे क्षेत्र में आज तक लाइट नहीं लग पाई जिसके कारण व्यापारियों को डर रहता है। यहीं नहीं पानी की सुविधा तक नहीं है। सुलभ सुविधा घर बनना था वो भी नहीं बना इस तरह आज भी कई असुविधाएं हैं जिनके कारण व्यापारियों का वहां जाना मुश्किल हो रहा है।
रात में ही नहीं दिन में भी लूट का डर
व्यापारियों का कहना है कि वो जगह शहर में होते हुए भी सुनसान रहती है जिसके कारण असुरक्षा का डर रहता है। व्यापारी और कर्मचारी दोनों को पेमेंट लाना-ले जाना होता है। इस दौरान लूट का डर बना रहता है। कई बार एसपी, टीआई और दूसरे अधिकारियों से पत्राचार करने के बाद भी चौकी या पुलिस नहीं मिली। लगातार चोरियां हो रही है। रात को कंस्ट्रक्शन का सामान भी चोरी हो रहा है। ये तमाम शिकायतें निगम, पुलिस और आईडीए के सामने रखी जा चुकी है, लेकिन फिर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
बाकी 477 को कहां ले जाएं...
आईडीए सीईओ द्वारा व्यापारियों की लीज समाप्त करने के लिए भेजे गए नोटिस को लेकर व्यापारियों का दल आईडीए चेयरमैन शंकर लालवानी से मिला और सख्ती का विरोध करते हुए शिफ्टिंग के लिए और समय मांगा। सचिव मोहम्मद हुसैन पिहावाला ने बताया कि एसोसिएशन में 800 सदस्य हैं जबकि प्लॉट 323 को मिले हैं। बाकी के लिए भी हमने जमीन मांगी है। जमीन नहीं मिलने की स्थिति में उन्हें कहां ले जाएं। यही नहीं नक्शा पास होने में हुई देरी ही इस विवाद का कारण है लिहाजा इसकी सजा व्यापारियों को नहीं मिलना चाहिए। अगर फिर भी व्यापारियों के साथ सख्ती होती है तो हम कोर्ट की शरण लेंगे और इस कार्रवाई का विरोध करेंगे। हम भी अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमें थोड़ा समय और दिया जाना चाहिए।
नक्शा पास नहीं होने के पीछे निगम और आईडीए के बीच के कारण हैं। इसकी सजा व्यापारियों को नहीं मिलना चाहिए। हमने बात कर मोहलत मांगी है। अगर फिर भी सख्ती की जाती है तो हम कोर्ट जाएंगे और फिर वहीं पर इस बात का फैसला होगा।
- मो. हुसैन पिहावाला
सचिव, इंदौर लोहा व्यापारी एसोसिएशन
व्यापारियों ने मौजूदा समस्याओं और नोटिस को लेकर मुझसे मुलाकात की है। व्यापारी निर्माण और शिफ्टिंग के लिए कुछ समय और चाह रहे हैं। देरी के कारणों और शिफ्टिंग के लिए दी जाने वाली मोहलत को लेकर विचार किया जाएगा। इसके लिए मौका मुआयना किया जाएगा और फिर ही कोई फैसला लिया जा सकेगा।
- शंकर लालवानी
चेयरमैन, इंदौर विकास प्राधिकरण
यह सही है कि शुरुआती दौर में नक्शे पास नहीं हुए, लेकिन नक्शे की स्वीकृृति मिले भी लगभग डेढ़ साल गुजर गया है जो निर्माण करवाकर शिफ्ट होने के लिए पर्याप्त है। नोटिस भेजने का काम बोर्ड की सहमति से हुआ है और सख्ती भी इसी निर्णय पर निर्भर करती है। लीज समाप्त करना और कब्जा लेना लगभग तय है, लेकिन फिर भी एक बार विचार किया जाएगा।
- दीपक सिंह
सीईओ, इंदौर विकास प्राधिकरण