मध्य प्रदेश स्थापना दिवस: राज्य गठन के समय इंदौर में चला था राजधानी आंदोलन
स्वतंत्रता के बाद जब देश में नई प्रशासनिक व्यवस्था आकार ले रही थी, तब इंदौर केवल मालवा का प्रमुख शहर नहीं, बल्कि मध्य भारत की सत्ता का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी था।
Publish Date: Sun, 01 Nov 2026 08:02:20 AM (IST)Updated Date: Sun, 01 Nov 2026 08:02:20 AM (IST)
दुर्लभ तस्वीर : मध्य भारत के राजप्रमुख महाराजा जीवाजीराव सिंधिया (बाएं से दूसरे) और उपराजप्रमुख महाराजा यशवंतराव होलकर द्वितीय (बाएं से तीसरे) इंदौर के गांधी हाल में विधानसभा की बैठक में शामिल होने आते थे। दोनों महाराजा गांधी हाल के मुख्य द्वार पर कार से उतरते नजर आ रहे हैं। सौजन्य : जफर अंसारी म्यूजियम ऑफ इंदौर।HighLights
- महाराजाओं के दौर में इंदौर-ग्वालियर थे सत्ता के केंद्र
- गर्मियों के साढ़े चार महीने इंदौर के गांधी हॉल से चलता था राजकाज
- साढ़े सात महीने ग्वालियर रहती थी राजधानी
अरविंद दुबे, नईदुनिया, इंदौर : स्वतंत्रता के बाद जब देश में नई प्रशासनिक व्यवस्था आकार ले रही थी, तब इंदौर केवल मालवा का प्रमुख शहर नहीं, बल्कि मध्य भारत की सत्ता का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी था। यहां के ऐतिहासिक गांधी हाल में मध्य भारत की विधानसभा की बैठकें हुआ करती थीं।
गर्मियों के साढ़े चार महीने राजधानी इंदौर में रहती थी और शेष साढ़े सात महीने ग्वालियर से शासन संचालित होता था। ग्वालियर के तत्कालीन महाराजा जीवाजीराव सिंधिया और होलकर रियासत के महाराजा यशवंतराव होलकर (द्वितीय) इस व्यवस्था के प्रमुख चेहरे थे। यही वह दौर था, जब इंदौर के गांधी हाल से मध्य भारत के प्रशासनिक फैसलों की गूंज सुनाई देती थी।
इंदौर, मालवा और ग्वालियर क्षेत्र को मिलाकर मध्य भारत का गठन किया गया था
इतिहासकार जफर अंसारी के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद इंदौर, मालवा और ग्वालियर क्षेत्र को मिलाकर मध्य भारत का गठन किया गया था। इसकी राजधानी की व्यवस्था इंदौर और ग्वालियर के बीच बंटी हुई थी। महाराजा जीवाजीराव सिंधिया मध्य भारत के राजप्रमुख और होलकर रियासत के महाराजा यशवंतराव होलकर द्वितीय उपराजप्रमुख थे।
गांधी हॉल के मुख्य द्वार पर दोनों महाराजाओं के कार से उतरकर विधानसभा की बैठक में शामिल होने पहुंचने का दुर्लभ चित्र उस दौर की राजनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। आज यह तस्वीर इंदौर के जफर अंसारी म्यूजियम आफ इंदौर में सुरक्षित है।
राजधानी के लिए इंदौर में हुआ था आंदोलन
समय के साथ देश की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया। एक नवंबर, 1956 को राज्यों के पुनर्गठन के साथ नए मध्य प्रदेश का गठन हुआ। इस बदलाव के साथ राजप्रमुखों और महाराजाओं के माध्यम से संचालित व्यवस्था समाप्त हो गई। मध्य भारत का अस्तित्व भी नए राज्य में समाहित हो गया।
भोपाल को नए मध्य प्रदेश की राजधानी बनाया गया। हालांकि, इंदौर के लिए यह बदलाव केवल प्रशासनिक सीमाओं के पुनर्गठन तक सीमित नहीं था। मध्य भारत के समय सत्ता का महत्वपूर्ण केंद्र रहे इस शहर में नए राज्य की राजधानी बनाने की मांग उठी। इसके लिए इंदौर में राजधानी आंदोलन भी हुआ था। शहर के लोगों की मांग थी कि इंदौर को नए मध्य प्रदेश की राजधानी बनाया जाए अंततः भोपाल को यह जिम्मेदारी मिली।