रामनाथ मुटकुळे, नईदुनिया, इंदौर : देश का दिल मध्यप्रदेश अपनी 70वीं वर्षगांठ मना रहा है। 1 नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश का गठन हुआ, उसके बाद निरंतर विकास के पायदान चढ़ रहे राज्य की अपनी अलग पहचान बनी है।
मालवा-निमाड़ में विविध कार्यों से विकास को गति मिल रही है। पग-पग रोटी, डग-डग नीर वाली धरती अब सोना उगलने को तैयार है। मालवा-निमाड़ की धरती अब विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी में है। कभी खेती-किसानी और पारंपरिक कारोबार के लिए पहचाने जाने वाले इस अंचल में अब उद्योगों का विस्तार हो रहा है। कहीं हजारों करोड़ रुपये के निवेश से औद्योगिक इकाइयों की नींव पड़ रही है तो कहीं रेल और राजमार्गों का नया जाल बिछ रहा है। धार्मिक आस्था के केंद्र भी नए स्वरूप में विकसित हो रहे हैं।
चारों ओर बिछ रहा रेलवे ट्रैक का जाल
निमाड़ और आदिवासी क्षेत्र रेल की सुविधा से अब तक वंचित थे, लेकिन अब इस ओर तेजी से काम हो रहा है। लंबे समय से प्रतीक्षित इंदौर-मनमाड़ रेलमार्ग का काम शुरू हो चुका है। इंदौर-खंडवा रेल लाइन का आमान परिवर्तन भी तेजी से जारी है। धार-इंदौर रेलवे भी शुरू होने की तैयारी में है। इससे जहां क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा, वहीं आर्थिक विकास करने में भी सहायता मिलेगी। नीमच-रतलाम रेलमार्ग के दोहरीकरण से परिवहन सुविधाओं को मजबूती मिली है। खंडवा में इंदौर-ऐदलाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर बोरगांव से धनगांव तक 58 किलोमीटर सड़क का निर्माण 1,158 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इससे महाराष्ट्र तक संपर्क सुगम हुआ है।
धार्मिक सर्किट से बढ़ेगा पर्यटन, होगा विकास
उज्जैन में 2028 में लगने वाले सिंहस्थ के चलते मालवा-निमाड़ के जिलों में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। इस क्षेत्र के धार्मिक पर्यटन को लेकर भी बड़े कार्य किए जा रहे हैं। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए खरगोन में 25 करोड़ रुपये की लागत से नवग्रह लोक बनाया जा रहा है, जिसके दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। वहीं, महेश्वर में सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 110 करोड़ रुपये की लागत से अहिल्या लोक प्रस्तावित है। सिंहस्थ -2028 की तैयारियों के तहत ओंकारेश्वर में लगभग 800 करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित हैं।
सिंहस्थ से बदलेगी तस्वीर
सिंहस्थ-2028 केवल महाकाल की नगरी उज्जैन का धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि यह पूरे मालवा क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक स्वरूप को बदलने वाला महाअभियान साबित होगा। सिंहस्थ की तैयारियों के लिए उज्जैन और आसपास के जिलों में 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अधोसंरचना परियोजनाएं संचालित हैं, जिनका सीधा लाभ उज्जैन के साथ इंदौर, देवास, रतलाम, शाजापुर और मंदसौर को भी मिलेगा।
मालवा-निमाड़ में धार्मिक सर्किट बनाए जाने की संभावना मजबूत हुई है
मध्य प्रदेश के ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों और प्रमुख देवस्थानों को मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल करने के बाद मालवा-निमाड़ में धार्मिक सर्किट बनाए जाने की संभावना मजबूत हुई है। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, हरसिद्धि शक्तिपीठ, गढ़कालिका मंदिर और आगर-मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी धाम को जोड़ते हुए मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा और सर्वाधिक प्रभावशाली धार्मिक सर्किट विकसित करने की योजना है।
तीर्थदर्शन योजना को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने का विचार
प्रदेश सरकार पहले ही श्री महाकाल महालोक, ओंकारेश्वर में एकात्म धाम, श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसी परियोजनाओं पर काम करवा रही है। ऐसे में तीर्थदर्शन योजना को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने का विचार इन परियोजनाओं को भी नई गति दे सकता है। महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर जैसे दो ज्योतिर्लिंगों के साथ शक्तिपीठों एवं सिद्धपीठों को जोड़ने वाला यह सर्किट अनूठा धार्मिक पर्यटन मॉडल बन सकता है। इससे मालवा-निमाड़ क्षेत्र राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित होगा।
पूरे मालवा की कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है
सिंहस्थ-2028 को दीर्घकालिक विकास के अवसर के रूप में देखा जा रहा है और इसके लिए पूरे मालवा की कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है। क्षेत्रीय विकास की सबसे बड़ी तस्वीर सड़क नेटवर्क में दिखाई दे रही है। करीब 2935 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग, 5017 करोड़ रुपये से उज्जैन-जावरा मार्ग, 2523 करोड़ रुपये से उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन और 2660 करोड़ रुपये से उज्जैन-गरोठ मार्ग का निर्माण हो रहा है। इन परियोजनाओं से उज्जैन की कनेक्टिविटी इंदौर, रतलाम, मंदसौर और राजस्थान सीमा तक मजबूत होगी, जिससे मालवा का व्यापार और पर्यटन दोनों गति पकड़ेंगे।
पर्यटन के लिहाज से मालवा-निमाड़ के लिए बड़ा अवसर
सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालु इंदौर, उज्जैन से लेकर ओंकारेश्वर और आसपास के क्षेत्र में रुकेंगे। प्रदेश के लिए पर्यटन के लिहाज से बड़ा मौका होगा। राज्य सरकार मालवा-निमाड़ क्षेत्र को लेकर ओंकार सर्किट तैयार कर रही है, जिसके विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाना है। वहीं मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड नर्मदा के तटों व घाटों पर स्थित खंडित शिवलिंग, नंदी भगवान या अन्य प्रतिमाओं के फोटो मंगा रहा है। इनके आधार पर इन खंडित प्रतिमाओं का पुनर्स्थापन किए जाने की तैयारी की जाएगी। महेश्वर में अहिल्या घाटों पर वर्षों से विद्यमान खंडित शिव पिंडों और नंदियों के सम्मानजनक पुनर्स्थापन और उनके स्थान पर नवीन शिवलिंग स्थापित कराने की दिशा में प्रयास प्रारंभ किए गए हैं।
जल्द पूरा होगा इंदौर-खंडवा नेशनल हाईवे का काम
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत इंदौर-खंडवा नेशनल हाईवे (एनएच-347बीजी) परियोजना को तेजी से पूरा करने की कवायद की जा रही है। बताया गया है कि इंदौर-खंडवा नेशनल हाईवे का संपूर्ण निर्माण कार्य इस वर्ष दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। वहीं लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहे भेरुघाट बायपास जुलाई तक बनकर तैयार हो जाएगा। बायपास शुरू होने के बाद घाट सेक्शन में भारी वाहनों की आवाजाही सुचारू हो सकेगी और दुर्घटनाओं के जोखिम में भी कमी आएगी।
इंदौर एयरपोर्ट रनवे को 4000 मीटर तक करने की तैयारी, उतर सकेंगे बड़े विमान
सिंहस्थ 2028 से पहले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण इंदौर एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार करेगा। इंदौर एयरपोर्ट के विकास एवं विस्तार, रनवे की लंबाई बढ़ाने और टैक्सीवे का निर्माण मास्टर प्लान 2047 के अंतर्गत किया जाएगा। इसके विकास के लिए दो चरणों में 143 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इंदौर एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार पहले चरण में 2,754 से बढ़ाकर 3,500 मीटर किया जाएगा। वहीं दूसरे चरण में इसे बढ़ाकर 4,000 मीटर करने की योजना है। इसके निर्माण से अधिक यात्री क्षमता के बढ़े विमान इंदौर एयरपोर्ट के रनवे पर उतर सकेंगे। इंदौर एयरपोर्ट का विकास एयरपोर्ट विजन प्लान 2047 के अनुसार किया जाएगा।
इंदौर, देवास व उज्जैन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ एयरपोर्ट सिटी
इंदौर-देवास-उज्जैन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ एयरपोर्ट सिटी विकसित की जाएगी। यह परियोजना पीपीपी माडल पर आधारित होगी, जिससे निवेश, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट पालिसी के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित होंगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
मध्यप्रदेश सरकार महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर को देश के सबसे आधुनिक और सुव्यवस्थित तीर्थस्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर और अन्य प्रमुख तीर्थ क्षेत्रों में दर्शन व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, ट्रैफिक और डिजिटल प्रबंधन को तकनीक आधारित बनाया जाएगा।
अतिथि सत्कार और उपजाऊ भूमि यहां की विशेषता
मालव माटी गहन गंभीर, पग-पग रोटी डग-डग नीर' ये पंक्तियां भले ही मालवा क्षेत्र की संस्कृति और समृद्धि की प्रतिनिधि अभिव्यक्ति रही हों लेकिन समूचा मध्य प्रदेश इससे सरोकार रखता है। इसका अर्थ यह है कि यहां की मिट्टी उर्वर और भू-जल स्तर, जल संसाधन इतने बेहतर हैं कि कदम कदम पर पानी उपलब्ध है। साथ ही उपलब्ध हैं जीने के संसाधन और रोज़गार के मौके। मध्य प्रदेश में मालवा हो या निमाड़, विंध्य हो या महाकोशल या बुंदेलखंड, अतिथि सत्कार और उपजाऊ भूमि यहां की विशेषता रही है। भरपूर पानी और उन्नत खेती, जिसका लाभ ना केवल स्थानीय लोग बल्कि अन्य राज्यों के लोगों को भी उपज के रूप में मिलता है। वहीं इस क्षेत्र में नर्मदा का पानी गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। हाल ही में माही नदी में नर्मदा का जल छोड़ा गया है।