
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। धान, गेहूं जैसी अधिक पानी वाली फसलों के स्थान पर अब मध्य प्रदेश में कम पानी वाली चना, मसूर, अरहर, उड़द जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए दलहन मिशन के अंतर्गत पांच वर्ष में 2442 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है।
इसका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं है बल्कि प्रसंस्करण उद्योग को प्रोत्साहित करना भी है ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बनें।
मिशन के तहत 55 नई दाल मिलें स्थापित की जाएंगी। प्रत्येक मिल के लिए भारत सरकार से 25 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा। बता दें, दलहन उत्पादन में मध्य प्रदेश का स्थान 28 प्रतिशत से ज्यादा के योगदान के साथ देश में पहला है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक देश होने के बाद भी देश में लगभग 60 प्रतिशत दलहन का आयात करना पड़ रहा है। देश को इस मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत सरकार ने 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक का दलहन मिशन लागू किया है।
इसमें मध्य प्रदेश की बड़ी भूमिका है क्योंकि यहां इसे विस्तार देने की संभावना अधिक है। इसे देखते हुए सरकार ने पंचवर्षीय कार्ययोजना तैयार की है। इसमें अरहर, उड़द और मसूर के क्षेत्र विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उत्पादन बढ़ाने के लिए जलवायु अनुकूल बीजों की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। उपज के भंडारण और प्रबंधन में प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग करने पर जोर रहेगा। आमतौर पर उपज का उचित दाम नहीं मिलने के कारण किसान दहलन फसल की बोवनी से कतराते हैं।
इसके समाधान के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के अंतर्गत मूल्य समर्थन योजना के मानदंडों के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) अरहर, उड़द और मसूर की खरीदी करेंगे।
नई दाल मिलें लगाने के लिए किसानों को 25 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। वहीं, यदि कोई सहकारी समिति खाद्य प्रसंस्करण का काम करना चाहती है तो उसे भी कृषि अधोसंरचना निधि से आर्थिक सहायता मिलेगी। दलहन में पहले और तिलहन में दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश भारत सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार खाद्यान्न, दलहन तथ तिलहन फसलों के उत्पादन में देश के शीर्ष तीन राज्यों में मध्य प्रदेश शामिल है।
मध्य प्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का 13.04 प्रतिशत है। दलहन क्षेत्र की बात करें तो प्रदेश में दलहन उत्पादन में 52 लाख 40 हजार टन उत्पादन हुआ, जो देश के कुल उत्पादन में 20.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहला स्थान पर है।
तिलहन क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति मजबूत है। मध्य प्रदेश ने 82 लाख 50 हजार टन उत्पादन करते हुए लगभग 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज कर देश से दूसरा स्थान हासिल किया। प्रदेश में देश का लगभग 35.27 प्रतिशत सोयाबीन होता है।
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