
धीरज बेलवाल, नईदुनिया। भारत के हृदय स्थल में बसा मध्य प्रदेश अपनी भौगोलिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। सामान्यतः किसी भी प्रदेश की पहचान उसकी एक मुख्य राजधानी से होती है, जहां से सत्ता का संचालन होता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश की महिमा इतनी विस्तृत है कि यहां केवल एक नहीं, बल्कि दस अलग-अलग राजधानियां मानी जाती हैं?
यह सुनने में थोड़ा अचरज भरा जरूर लग सकता है, लेकिन यह सच है। यदि आप मध्य प्रदेश की रग-रग से वाकिफ होना चाहते हैं, तो आपको इसकी इन दस राजधानियों के सफर पर निकलना होगा। आइए, जानते हैं मध्य प्रदेश की इन 'दस राजधानियों' का दिलचस्प लेखा-जोखा।
भोपाल, जिसे 'झीलों की नगरी' भी कहा जाता है, मध्य प्रदेश की मुख्य प्रशासनिक राजधानी है। यह वह स्थान है जहां राज्य की सत्ता की धड़कनें महसूस की जा सकती हैं। यहां प्रदेश के महामहिम राज्यपाल का निवास है, तो वहीं मुख्यमंत्री और पूरा मंत्रिमंडल यहीं से सरकार का संचालन करते हैं। मंत्रालय और सचिवालय की गलियारों से निकलने वाली नीतियां ही पूरे प्रदेश का भविष्य तय करती हैं।

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मध्य प्रदेश की आर्थिक रीढ़ और सपनों का शहर इंदौर राज्य की कमर्शियल कैपिटल है। अपनी व्यापारिक गतिविधियों और आधुनिक जीवनशैली के कारण इसे 'मिनी मुंबई' के नाम से भी नवाजा जाता है। मध्य भारत का यह सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देता है, बल्कि देश के बड़े औद्योगिक हब के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है।

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जहां विवादों का अंत होता है और न्याय की मशाल जलती है, वह शहर है जबलपुर। इसे मध्य प्रदेश की न्यायधानी कहा जाता है क्योंकि प्रदेश का 'हाईकोर्ट' इसी शहर की शान बढ़ा रहा है। हालांकि ग्वालियर और इंदौर में भी हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थित हैं, लेकिन न्याय का मुख्य केंद्र जबलपुर ही है।

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अंधेरे को चीरकर पूरे प्रदेश और देश के एक बड़े हिस्से को रौशन करने वाली ऊर्जा राजधानी का गौरव सिंगरौली को प्राप्त है। यहां स्थित भारत का विशाल थर्मल पावर स्टेशन अपनी 4,760 मेगावाट की प्रचंड बिजली उत्पादन क्षमता के साथ खड़ा है। यह वह स्थान है जहाँ कोयले की खदानों और पावर प्लांटों से राष्ट्र की प्रगति को ऊर्जा मिलती है।

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जब मन शांति और आध्यात्म की तलाश करता है, तो पैर स्वयं उज्जैन की ओर मुड़ जाते हैं। शिप्रा नदी के पावन तटों पर बसी यह नगरी मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक 'महाकालेश्वर' की महिमा यहां कण-कण में बसी है। मंदिरों और घाटों की यह नगरी सदियों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है।

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जबलपुर केवल न्याय का केंद्र नहीं है, बल्कि इसे मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी या 'संस्कारधानी' भी कहा जाता है। महान विचारक आचार्य विनोबा भावे यहां के निवासियों की शालीनता, मधुर व्यवहार, संयम और उच्च विचारधारा से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने इसे यह उपाधि दी थी।

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ग्रीष्म ऋतु की तपिश से राहत पाने के लिए मध्य प्रदेश के पास अपनी समर कैपिटल भी है- पचमढ़ी। सतपुड़ा की पहाड़ियों की गोद में स्थित यह खूबसूरत हिल स्टेशन राज्य का 'शिमला' कहलाता है। अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, झरनों और गुफाओं के साथ पचमढ़ी पर्यटकों के लिए एक अलौकिक अनुभव प्रदान करता है।

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प्रकृति ने मध्य प्रदेश की झोली खनिजों से भरपूर भरी है। बालाघाट जिला इस मामले में विशेष है, जिसे राज्य की मैंगनीज कैपिटल कहा जाता है। भारत में उत्पादित होने वाले कुल मैंगनीज का लगभग 80% हिस्सा इसी जिले की धरती से आता है, जो इसे पूरे भारत में एक विशिष्ट पहचान दिलाता है।

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इंदौर केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि खेलों के जुनून में भी आगे है। मध्य प्रदेश की स्पोर्ट्स कैपिटल कहा जाने वाला यह शहर प्रसिद्ध होलकर स्टेडियम का घर है। इस शहर ने पलक शर्मा, वेंकटेश अय्यर और आवेश खान जैसे दिग्गज खिलाड़ी देश को दिए हैं, जो विश्व पटल पर मध्य प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं।

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स्वाद के शौकीनों के लिए इंदौर किसी जन्नत से कम नहीं है। इसे मध्य प्रदेश की स्ट्रीट फूड कैपिटल और 'भारत की नमकीन राजधानी' भी कहा जाता है। सराफा बाजार हो या छप्पन दुकान, यहां के जायके और अनोखे स्वाद का जादू ऐसा है कि जो एक बार चख ले, वह बार-बार यहां खींचा चला आता है।

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मध्य प्रदेश की ये 10 राजधानियां इस बात का प्रमाण हैं कि यह राज्य कितना विविधतापूर्ण और समृद्ध है। यहां प्रशासनिक सूझ-बूझ है, तो न्याय की निष्पक्षता भी; यहां धार्मिक आस्था की गहराई है, तो खेलों का उत्साह भी; यहां खनिजों की खान है, तो प्रकृति का सुकून भी। इन सभी पहलुओं को जोड़कर ही मध्य प्रदेश 'हिन्दुस्तान का दिल' बनता है।
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