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ढाई सौ बैंक खातों की जानकारी साइबर ठगों को देता था, इंदौर में मुख्य आरोपी गिरफ्तार

ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत की गई कार्रवाई में नेटवर्क की एक और कड़ी सामने आई है। क्राइम ब्रांच ने बालेश्वर राठौर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार वह ...और पढ़ें

By Mukesh MangalEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 06:35:05 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 06:35:05 PM (IST)
ढाई सौ बैंक खातों की जानकारी साइबर ठगों को देता था, इंदौर में मुख्य आरोपी गिरफ्तार
पकड़ा गया साइबर ठगी का मुख्य आरोपी। (एआई इमेज)

HighLights

  1. पहले पकड़े गए ललित के बैग से मिले थे 21 पासबुक
  2. 20 चेकबुक, 8 एटीएम और 7 क्यूआर कोड भी मिले
  3. क्राइम ब्रांच ने बालेश्वर राठौर को गिरफ्तार किया है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत की गई कार्रवाई में नेटवर्क की एक और कड़ी सामने आई है। क्राइम ब्रांच ने बालेश्वर राठौर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार वह ढाई सौ से अधिक बैंक खातों की जानकारी नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपितों को शेयर कर चुका था।

दरअसल, क्राइम ब्रांच ने नेहरू पार्क रोड इसके पहले से ललित उर्फ ऋषि सुतार को पकड़ा था। उसके पास मौजूद लैपटॉप बैग की तलाशी में 21 बैंक पासबुक, आठ एटीएम कार्ड, 20 चेकबुक, सात क्यूआर कोड और एक एचपी लैपटॉप मिला था। पूछताछ में वह इन दस्तावेजों के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दे पाया।


शिकायतों का कनेक्शन अलग-अलग राज्यों से मिला

पुलिस ने जब्त बैंक खातों की जानकारी एनसीआरपी पोर्टल पर जांची तो कई खातों से साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें जुड़ी मिलीं। इनमें निवेश के नाम पर ठगी, एपीके के जरिए फ्राड और अन्य प्रकार से ऑनलाइन वित्तीय अपराध शामिल हैं। शिकायतों का कनेक्शन अलग-अलग राज्यों से मिला।

250 से अधिक बैंक खातों की जानकारी दूसरे आरोपियों तक पहुंचाई

इसी जांच को आगे बढ़ाने पर पुलिस के सामने बालेश्वर राठौर की भूमिका आई। पुलिस के अनुसार उसने 250 से अधिक बैंक खातों की जानकारी दूसरे आरोपितों तक पहुंचाई थी। अब इन खातों के वास्तविक खाताधारकों, उनमें हुए संदिग्ध लेन-देन और साइबर ठगी की रकम के ट्रेल की जांच की जा रही है।

लैपटॉप और खातों से खुलेगा नेटवर्क

क्राइम ब्रांच जब्त पासबुक, चेकबुक, एटीएम, क्यूआर कोड और लैपटॉप से मिले डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इन खातों की जानकारी आगे किन लोगों तक पहुंची और उनका इस्तेमाल किन साइबर अपराधों में हुआ। 250 से ज्यादा खातों का यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके पीछे कौन-कौन लोग हैं, इसकी जांच जारी है।

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