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मालेगांव बम ब्लास्ट केस महू के लोकेश शर्मा व देपालपुर के राजेंद्र चौधरी समेत चार को राहत

मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महू के लोकेश शर्मा और देपालपुर के राजेंद्र चौधरी समेत चार आरोपितों के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 23 Apr 2026 07:44:41 AM (IST)Updated Date: Thu, 23 Apr 2026 07:47:37 AM (IST)
मालेगांव बम ब्लास्ट केस महू के लोकेश शर्मा व देपालपुर के राजेंद्र चौधरी समेत चार को राहत
लोकेश शर्मा और राजेंद्र चौधरी।

HighLights

  1. एनआईए ने 2013 में किया था गिरफ्तार, 2019 में मिली थी जमानत; हाईकोर्ट बोला- बिना सुनवाई 6 साल जेल में रखा
  2. स्वामी असीमानंद के बयान पर टिकी थी चार्जशीट, बाद में कहा- यातना देकर लिया था बयान; वकील बोले- कोई चश्मदीद नहीं
  3. 8 सितंबर 2006 को मालेगांव में 4 धमाकों में 31 की मौत, 312 घायल; एटीएस ने 9 मुस्लिम युवकों को पकड़ा था, 2016 में बरी हुए

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में बाम्बे हाईकोर्ट ने चार आरोपितों के खिलाफ चल रही ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी। इससे महू के लोकेश शर्मा और देपालपुर के राजेंद्र चौधरी को भी बड़ी राहत मिली है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने लोकेश और राजेंद्र चौधरी व मृतक सुनील जोशी सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ विशेष न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसका आधार स्वामी असीमानंद द्वारा 2010 में दिए उस बयान को आधार बनाया गया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि सुनील जोशी ने उन्हें बताया था कि मालेगांव धमाका उनके छह लड़कों ने किया था।


हालांकि, बाद में असीमानंद अपने इस बयान को यह कहते हुए वापस ले लिया था कि उन्हें यातना देकर बयान लिए गए थे। आरोपितों के वकील कौशिक म्हात्रे ने हाई कोर्ट में तर्क दिया कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। जिस बयान पर दूसरी अदालतों ने भरोसा नहीं किया, उसके आधार पर आरोप तय नहीं किए जा सकते।

6 साल जेल में रहना पड़ा

कोर्ट ने उनके तर्कों से सहमत होते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी, लेकिन लोकेश शर्मा और राजेंद्र चौधरी सहित चारों आरोपियों को मामले में करीब छह साल तक जेल में रहना पड़ा। बता दें कि एनआईए ने चारों को 2013 में गिरफ्तार किया था। 2019 में हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए यह टिप्पणी की थी कि उन्हें मुकदमे की सुनवाई पूरी हुए बिना छह साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया।

धमाकों में 31 लोग मारे गए थे

दरअसल, महाराष्ट्र के मालेगांव में आठ सितंबर 2006 को हमीदिया मस्जिद, बड़े कब्रिस्तान परिसर और मुशावरत चौक पर हुए चार बम धमाकों में 31 लोग मारे गए थे और 312 लोग घायल हुए थे। महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) ने जांच के दौरान नौ मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया लेकिन 2016 में विशेष अदालत ने सबूत के अभाव में सभी को बरी कर दिया। बाद में मामले की जांच सीबीआई और एनआईए को सौंपी गई थी।

6 साल जेल में रहे

एनआईए ने अपनी जांच में दावा किया कि धमाकों के पीछे दक्षिणपंथी हिंदू उग्रवादी समूहों से जुड़े लोग थे। एजेंसी ने महू के लोकेश शर्मा, देपालपुर के राजेंद्र चौधरी, धनसिंह और मनोहर नरवरिया को आरोपित बनाया। सितंबर 2025 में विशेष अदालत ने चारों अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए, जिसके बाद चारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, हाईकोर्ट ने जनवरी 2026 में उनकी याचिकाओं और तर्कों से सहमत होते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी।

बता दें कि एनआईए ने लोकेश शर्मा और राजेंद्र चौधरी को 2013 में गिरफ्तार किया था। चारों लोग करीब छह साल तक जेल में रहे। 2019 में हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए यह टिप्पणी की थी कि उन्हें मुकदमे की सुनवाई पूरी हुए बिना छह साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया।

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