
टीम नईदुनिया, मालवा-निमाड़: आगामी बजट को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में उम्मीदों का माहौल है। कहीं युवाओं के रोजगार को लेकर अपेक्षाएं हैं तो कहीं महिला सुरक्षा, उद्योग, खेती और बुनियादी सुविधाओं पर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की जा रही है। इंदौर से लेकर मंदसौर, शाजापुर, खंडवा, बुरहानपुर और देवास तक लोगों की नजर बजट पर टिकी है, ताकि विकास की रफ्तार तेज हो और आमजन की समस्याओं का समाधान हो सके।
इंदौर जिले में रोजगार को लेकर सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक अप्रैल से 22 जनवरी तक 5336 युवाओं को रोजगार मिला। इसके लिए 10 युवा संगम कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें इंदौर, पीथमपुर, धार, देवास सहित अन्य जिलों की निजी कंपनियों ने भाग लिया।
जिला रोजगार कार्यालय के उप संचालक पीएस मंडलोई के अनुसार, निजी कंपनियों के चयनकर्ताओं ने युवाओं का प्रारंभिक चयन किया और कई को कंपनियों की मांग के अनुसार भेजा गया। इसके साथ ही करीब एक हजार युवाओं को स्वरोजगार से जुड़ी जानकारी देकर स्वयं का रोजगार शुरू करने में मदद की गई।
बुरहानपुर में बजट से ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बड़े क्षेत्र को पेयजल और सिंचाई की सुविधा देने के साथ भूमिगत जलस्तर बढ़ाने में सहायक होगी। जानकारों का मानना है कि बजट में राशि का प्रबंध होने से परियोजना का काम तेज होगा।
इसके अलावा तीसरी और चौथी रेल लाइन तथा खंडवा-अकोला रेल लाइन के कार्य में भी तेजी आने की संभावना है। ऐतिहासिक और पुरातत्व महत्व की धरोहरों जैसे कुंडी भंडारा, शाही किला और असीरगढ़ किला को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की भी आस है।
महिला सुरक्षा को लेकर देवास और बुरहानपुर से सशक्त आवाज उठी है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रीति सिंह राठौड़ का कहना है कि बजट में महिला सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान होने चाहिए। यदि कोई महिला थाने नहीं जा सकती तो पुलिस को घर जाकर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
लेखक रविन्द्र सिंह ठाकुर का मानना है कि महिला सुरक्षा केवल कानून नहीं, बल्कि तेज न्याय, सुरक्षित सड़कें, रोशनी से भरे सार्वजनिक स्थान और संवेदनशील पुलिस व्यवस्था से संभव है। गृहिणी पायल कानूनगो ने बढ़ते महिला अपराध और बच्चों के अपहरण पर चिंता जताते हुए बजट में ठोस कदम उठाने की मांग की है।
खंडवा से किसानों के हित में सुझाव आए हैं। भारतीय किसान संघ के जिला संयोजक सुभाष पटेल ने प्याज, मक्का, हल्दी, अद्रक और अरबी जैसी उपज की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने, कोल्ड स्टोरेज योजना को किसानों के लिए शुरू करने और जीरामजी योजना को खेती से जोड़ने की मांग की है। वहीं विशाल गंगराड़े का कहना है कि पूंजीगत व्यय से स्कूल, अस्पताल और सड़कों का निर्माण होगा, लेकिन इन कार्यों में इमानदारी भी जरूरी है।
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शाजापुर में खेती के साथ उद्योग की जरूरत पर जोर दिया गया है। पलायन जिले की बड़ी समस्या बन चुका है, जिसका समाधान उद्योग स्थापना से ही संभव है। यहां खाद्य प्रसंस्करण और पर्यटन की संभावनाएं हैं, लेकिन बजट के अभाव में योजनाएं जमीन पर नहीं उतर पा रहीं।
मंदसौर में तीन नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की उम्मीद बजट से जुड़ी है। जग्गाखेड़ी, सेमली काकड़ और बसई क्षेत्र में उद्योग लगने से हजारों लोगों को रोजगार मिल सकता है। जिले में बिजली, पानी, जमीन और मानव श्रम उपलब्ध होने के बावजूद औद्योगिक विकास ठहरा हुआ है। कुल मिलाकर, बजट से प्रदेश के इन जिलों को रोजगार, महिला सुरक्षा, किसान हित और औद्योगिक विकास की बड़ी उम्मीदें हैं। अब देखना यह है कि सरकार इन अपेक्षाओं को किस हद तक जमीन पर उतार पाती है।