
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। हाई कोर्ट के आदेश का जब पालन नहीं हुआ तो 26 साल बाद अवमानना याचिका लेकर दोबारा हाई कोर्ट पहुंचे उज्जैन निवासी हरसिद्धी प्रसाद को निराशा हाथ लगी। हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका प्रस्तुत करने में हुई 9285 दिन की देरी को गंभीर मानते हुए अवमानना याचिका पर सुनवाई से ही इनकार कर दिया।
कोर्ट ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता का इतने लंबे समय बाद अवमानना याचिका लेकर कोर्ट पहुंचना बताता है कि उन्होंने डुप्लीकेट अंकसूची जारी करने के कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए गंभीरता से कोई प्रयास ही नहीं किए।
वर्ष 2000 में उज्जैन निवासी हरसिद्धी प्रसाद ने हायर सेकंडरी स्कूल परीक्षा की डुप्लीकेट मार्कशीट जारी करने के संबंध में याचिका प्रस्तुत की थी। 14 फरवरी 2000 को हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि स्कूली शिक्षा विभाग याचिकाकर्ता को मार्कशीट की डुप्लीकेट कापी दे।
याचिकाकर्ता ने यह आरोप लगाते हुए कि कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें मार्कशीट की डुप्लीकेट कापी नहीं मिली, 26 साल बाद 20 जुलाई को हाई कोर्ट में अवमानना याचिका प्रस्तुत की।
इससे कुछ पहले भी याचिकाकर्ता ने एक अवमानना याचिका प्रस्तुत की थी लेकिन आदेश की तामील का प्रमाण प्रस्तुत करने वाले दस्तावेजों के साथ नई याचिका प्रस्तुत करने की अनुमति लेकर उस याचिका को वापस ले लिया था।
इसके बाद उन्होंने दोबारा अवमानना याचिका प्रस्तुत की। इस बार कोर्ट ने यह कहते हुए कि अवमानना याचिका प्रस्तुत करने में 9285 दिन की देरी हुई है और यह सामान्य नहीं है, अवमानना याचिका निरस्त कर दी।