
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: वाराणसी में ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने की घटना ने देशभर में आस्था और विरासत से जुड़े लोगों को आहत किया है। इस मुद्दे को लेकर इंदौर में भी जनप्रतिनिधियों और समाजजनों के बीच तीव्र आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करना स्वीकार्य नहीं है।
गुरुवार को धनगर समाज सहित अन्य समाजों के प्रतिनिधियों की बैठक महाराजा यशवंतराव स्कूल में आयोजित की गई। बैठक में समाज के पदाधिकारी, शहर के वरिष्ठ नागरिक और अहिल्या भक्त शामिल हुए। सभी ने एकमत से मांग की कि वाराणसी प्रशासन देवी अहिल्याई बाई होलकर द्वारा बनवाए गए मणिकर्णिका घाट का मूल स्वरूप पुनः बहाल करे।
श्री अहिल्योत्सव समिति के उपाध्यक्ष सुधीर देडगे ने बताया कि मणिकर्णिका घाट का निर्माण लोकमाता देवी अहिल्याई होलकर द्वारा वर्ष 1771 में कराया गया था। यह घाट लगभग 250 वर्षों से न केवल ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि आस्था का प्रमुख केंद्र भी रहा है। उन्होंने कहा कि बिना समुचित योजना के इस तरह की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि विकास कार्यों का विरोध नहीं किया जा रहा है, लेकिन जिन ऐतिहासिक धरोहरों और मंदिरों का निर्माण जनकल्याण के उद्देश्य से किया गया था, उन्हें नासमझी में ध्वस्त करना समाज की भावनाओं को आहत करता है। धनगर, गड़रिया, पाल, बघेल समाज सहित धनगर समाज की सभी उपजातियों ने इस कार्रवाई को गलत ठहराया।
समाजजनों ने मांग की कि इस कथित कृत्य के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाए। साथ ही मणिकर्णिका घाट और उससे जुड़े देवस्थानों का पुनर्निर्माण कर लोकमाता देवी अहिल्याई होलकर की प्रतिमाएं पुनः स्थापित की जाएं।
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इस विषय में खासगी ट्रस्ट के पदाधिकारियों को प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने वाराणसी नगर निगम की जारी सूचना मंगवाई है और स्थानीय लोगों से भी चर्चा की है। उनके अनुसार विकास कार्य के दौरान गलती स्वीकार की गई है और क्षतिग्रस्त मंदिर को सुधारने का आश्वासन भी दिया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सुधार की प्रक्रिया में समय लगता है और समाधान अवश्य निकलेगा।
घाट पर पुन: लगवाई जाए मूर्तिया वाराणसी के मनिकर्णिका घाट पर जो भी हुआ, वो गलत है। हमारी मांग है कि फिर से उसी स्थान पर मूर्तियां लगवाई जाए। वाराणसी में देवी अहिल्याई बाई होलकर की यादों को सहेजने के लिए उस समय के मूर्तियों के लिए एक म्युजियम भी बनाया जाए।
-हरीश बारगल, अध्यक्ष क्षत्रिस धनगर सेवा संघ
घाट का जो हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ वहां की प्रतिमाएं व चिन्ह को यथोचित स्थान पर रखे मणिकर्णिका के घाट को 1791 में देवी अहिल्याबाई होलकर ने बनवाया और वहां पर उत्तर कार्य होते रहे। वाराणसी में सभी घाटों के नवीनीकरण कार्य में कुछ हिस्सा उस घाट का भी क्षतिग्रस्त हुआ। वहां पर जो भी विग्रह व प्रतिमाएं व चिन्ह मिले है, उन्हें संग्रहित कर रखा गया है। हमारी मांग है कि इन्हें सम्मानपूर्वक यथोचित स्थान पर स्थापित किया जाए।
-उदय सिंह राव होलकर, होलकर वंशज