
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सेंट्रल जेल में बीमार हुए 50 से ज्यादा कैदियों में से 3 में डेगू की पुष्टि हुई है। ज्यादातर कैदियों को टायफाइड निकला है। 2 अक्टूबर को बुखार के बाद एक कैदी की मौत हो गई थी। हालांकि इस मरीज की रिपोर्ट में डेंगू से मौत की पुष्टि तो नहीं हुई।
मौत की वजह सिकलसल एनिमिया बताया गया। लेकिन इसके बाद कई कैदियों को बुखार आने के बाद जेल प्रशासन हरकत में आया और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी गई। कैदियों को उपचार के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया, जहां जांच के बाद तीन कैदियों में डेंगू की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। इसके बाद 4 अक्टूबर से स्वास्थ्य विभाग के अमले द्वारा जेल परिसर में मौजूद डेंगू के लार्वा को नष्ट करने की कवायद की जा रही है। 15 दिन में एमवाय में 32 कैदियों को भर्ती कराया गया। फिलहाल 18 कैदी उपचाररत हैं।
सेंट्रल जेल में बुखार का सिलसिला शुरू हुआ तो इसकी चपेट में 50 से ज्यादा कैदी आ गए हैं। ज्यादातर को टायफाइड हुआ है। जेल अधीक्षक दिनेश नरगांवे ने बताया कि लगभग 20 मरीज ठीक हो चुके हैं और बाकी का उपचार चल रहा है।
मलेरिया विभाग की टीम जब जेल में डेंगू का लार्वा नष्ट करने पहुंची तो उन्हें तीन से चार हजार कंटेनरों में डेंगू का लार्वा मिला है, जिसे दवाइयां डालकर नष्ट किया गया है। बताया जा रहा है कि हर कैदी के पास एक बर्तन और एक बाल्टी होती है जिसमें वह नहाने और टायलेट के लिए पानी स्टोर करता है।
इन बर्तनों में ही मलेरिया विभाग की टीम को डेंगू के लार्वा मिले। सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी ने बताया कि सेंट्रल जेल से सूचना मिलने के बाद तत्काल विभाग की ओर से टीम को लार्वा नष्ट करने भेजा गया था। जेल परिसर काफी बढ़ा होने की वजह से 4 अक्टूबर से लेकर 8 अक्टूबर तक टीम ने वहां जाकर लार्वा नष्ट किया है और दवाइयां छिटकी हैं।
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