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MP की 7 लाख आदिवासी महिलाओं का हक अटका, लाड़ली बहना और पोषण योजना के नियमों में फंसीं; हाई कोर्ट पहुंचा मामला

मध्य प्रदेश में बैगा, भारिया और सहरिया समुदाय की महिलाओं को लाड़ली बहना योजना से अपात्र किए जाने के मुद्दे पर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई।

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Fri, 02 Oct 2026 11:51:09 AM (IST)Updated Date: Fri, 02 Oct 2026 11:51:09 AM (IST)
MP की 7 लाख आदिवासी महिलाओं का हक अटका, लाड़ली बहना और पोषण योजना के नियमों में फंसीं; हाई कोर्ट पहुंचा मामला
MP की 7 लाख आदिवासी महिलाओं का हक अटका। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. सात लाख आदिवासी महिलाओं को योजना से बाहर करने का मामला।
  2. लाड़ली बहना योजना के क्लॉज 4.4 पर सवाल उठे।
  3. पोषण अनुदान राशि पाने वाली महिलाएं अपात्र मानी गईं।

डिजिटल डेस्क। मध्य प्रदेश की लगभग सात लाख आदिवासी महिलाओं के लिए सरकारी नियम वरदान की जगह एक बड़ी उलझन बन गए हैं। प्रदेश की सबसे पिछड़ी और अति संवेदनशील जनजातियों (बैगा, भारिया और सहरिया) की ये महिलाएं प्रशासनिक लालफीताशाही के चलते अपने हकों से वंचित हो रही हैं।

उन्हें एक योजना का लाभ मिलने की भारी कीमत दूसरी बड़ी योजना से बाहर होकर चुकानी पड़ रही है। इस अजीबोगरीब विसंगति के खिलाफ अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर न्याय की गुहार लगाई गई है।


लाड़ली बहना और पोषण आहार योजना आपस में टकराईं

दरअसल, राज्य सरकार की दो बड़ी योजनाएं 'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना 2023' और 'खाद्य/पोषण अनुदान योजना' कानूनी पेंच में फंस गई हैं। पूर्व विधायक और सामाजिक कार्यकर्ता पारस सकलेचा ने अपने अधिवक्ता मनीष यादव के जरिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि इन सात लाख पात्र आदिवासी महिलाओं को भी लाड़ली बहना योजना में शामिल किया जाए, जिन्हें तकनीकी कारणों का हवाला देकर बाहर कर दिया गया है।

क्लॉज 4.4 कैसे बना महिलाओं के लिए परेशानी का सबब?

  • याचिका के मुताबिक, इस पूरी परेशानी की जड़ लाड़ली बहना योजना का 'क्लॉज 4.4' है। इस नियम में यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई महिला पहले से ही किसी सरकारी योजना के तहत प्रतिमाह 1000 रुपये या उससे अधिक की राशि प्राप्त कर रही है, तो वह लाड़ली बहना योजना के लिए अपात्र मानी जाएगी।

  • आरोप है कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसी क्लॉज का गलत अर्थ निकाल लिया है। चूंकि इन आदिवासी महिलाओं के खातों में पोषण आहार के लिए 1500 रुपये आ रहे हैं, इसलिए विभाग ने उन्हें 'स्वयं इस राशि की प्राप्तकर्ता' मानते हुए लाड़ली बहना योजना के 1000-1250 रुपये पाने के अयोग्य घोषित कर दिया।
  • विधानसभा में सरकार भी मान चुकी है यह बात

    यह मामला सिर्फ कागजी नहीं है, बल्कि सरकार खुद इस बात को स्वीकार कर चुकी है। 2 दिसंबर 2025 को विधानसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री ने लिखित रूप में यह माना था कि क्लॉज 4.4 के नियमों के तहत ही इन आदिवासी महिलाओं को अपात्र माना गया है, क्योंकि वे पहले से पोषण आहार योजना के 1500 रुपये ले रही हैं। अब देखना यह होगा कि हाई कोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है और क्या इन गरीब आदिवासी महिलाओं को योजना का लाभ मिल पाता है।

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