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नईदुनिया प्रतिनिधि, मालवा-निमाड़। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती लागत के बीच मध्य प्रदेश के किसानों की नजरें आगामी बजट पर टिकी हैं। मालवा-निमाड़ क्षेत्र के कृषकों का मानना है कि खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए अब केवल पारंपरिक तरीकों से काम नहीं चलेगा। किसानों ने 'बीज से बाजार' तक की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की मांग की है, जिसमें स्मार्ट तकनीक, फूड प्रोसेसिंग और एमएसपी (MSP) की गारंटी प्रमुख हैं।
धार जिले के ग्राम पीपल्दा के किसान नारायण पाटीदार का कहना है कि अनिश्चित मौसम खेती के लिए सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है। किसानों की मांग है कि सरकार बजट में ऐसे क्लाइमेट-रेजिलिएंट (जलवायु सहनशील) बीजों के अनुसंधान और वितरण पर ध्यान दे, जो कम पानी या अधिक तापमान में भी खराब न हों। साथ ही, सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए ग्राम स्तर पर मौसम केंद्रों की स्थापना और मोबाइल अलर्ट सिस्टम को अनिवार्य बनाने की जरूरत बताई गई है।
बदनावर के टमाटर उत्पादक हों या शाजापुर के संतरा किसान, दोनों की एक ही पीड़ा है उचित भंडारण और प्रोसेसिंग की कमी।
टमाटर: किसानों के अनुसार, सॉस और पाउडर बनाने की यूनिट्स लगने से टमाटर फेंकने की नौबत नहीं आएगी।
संतरा: शाजापुर के किसानों ने गुजरात की तर्ज पर 'संतरा हब' और ग्रेडिंग सेंटर की मांग की है ताकि व्यापारियों के एकाधिकार को समाप्त कर सीधे लाभ कमाया जा सके।
देवास के किसानों ने लागत के अनुपात में फसलों के दाम बढ़ाने की मांग की है। किसान हुकुमचंद पटेल के अनुसार, सोयाबीन के दाम 8 से 9 हजार रुपये प्रति क्विंटल होने चाहिए। वहीं, फसल बीमा में सैटेलाइट सर्वे की जगह पुराने 'फसल कटाई प्रयोग' को अपनाने की मांग की गई है ताकि नुकसान का वास्तविक आंकलन हो सके। पराली प्रबंधन के लिए सस्ती मशीनों की उपलब्धता को भी बजट के मुख्य एजेंडे में शामिल करने की अपील की गई है।
इंदौर के निर्यातकों ने बजट में एक्सपोर्ट इंसेंटिव को फिर से बहाल करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि सोयाबीन डीओसी और रैपसीड मील पर इंसेंटिव घटने से निर्यात में 60% तक की गिरावट आई है। यदि सरकार फ्रेट सब्सिडी और इंसेंटिव बढ़ाती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा किसानों को ऊंची कीमतों के रूप में मिलेगा।