
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रयागराज कुंभ गर्ल के रूप में प्रसिद्ध हुई महेश्वर की युवती के जन्म प्रमाण पत्र को लेकर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने महेश्वर नगर परिषद द्वारा 31 मार्च 2026 को जन्मतिथि में सुधार संबंधी जारी आदेश को निरस्त करते हुए कहा है कि जन्मतिथि में बदलाव से युवती के हित प्रभावित होंगे, लेकिन उसे इस मामले में सुनवाई का अवसर ही नहीं दिया गया।
बगैर किसी को सुने उसके जन्म रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जा सकता। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरित है। युवती के माता-पिता ने 30 मई 2025 को नगर परिषद कार्यालय में आवेदन देकर उसकी जन्मतिथि एक जनवरी 2008 बताते हुए जन्म प्रमाण-पत्र जारी करने का मांग की थी। पांच जून 2025 को युवती की जन्मतिथि एक जनवरी 2008 दर्ज करते हुए परिषद ने जन्म प्रमाण-पत्र जारी कर दिया।
इस प्रमाण-पत्र के हिसाब से युवती एक जनवरी 2026 को वयस्क हो गई। उसने 11 मार्च 2026 को अपनी पसंद से विवाह कर लिया। इसके बाद उसके पिता ने उसकी जन्मतिथि में सुधार के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया।
इसमें कहा कि बेटी का जन्म सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था। अस्पताल के रिकॉर्ड में जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज है। इस आधार पर परिषद ने युवती के जन्म प्रमाण-पत्र में बदलाव करते हुए जन्मतिथि एक जनवरी 2008 के बजाय 30 दिसंबर 2009 कर दी।
जन्म प्रमाण-पत्र में किए गए इस बदलाव को चुनौती देते हुए युवती और उसके पति ने हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की थी। इसमें कहा कि वर्ष 2015 में जारी आधार कार्ड में युवती की जन्मतिथि एक जनवरी 2008 ही दर्ज है। पैन कार्ड भी इसी जन्मतिथि के हिसाब से जारी हुआ था। युवती का कहना था कि जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव से पहले उसका पक्ष भी नहीं सुना गया।
मप्र हाई कोर्ट की युगलपीठ ने याचिका स्वीकारते हुए कहा कि बगैर किसी को सुने उसके प्रमाण पत्र में बदलाव नहीं किया जा सकता। यह प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है। कोर्ट ने महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 31 मार्च 2026 को जारी आदेश निरस्त करते हुए कहा कि युवती के पिता द्वारा जन्मतिथि में सुधार के लिए दिए गए आवेदन पर युवती को सुनवाई का अवसर देकर कानून के प्रविधानों के अनुसार नए सिरे से निर्णय लें।
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