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Indore के MYH अस्पताल में फिर लापरवाही... चूहों के बाद अब HIV यूनिट तक बिल्लियों का आतंक

महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) में एक बार फिर लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। इस बार एचआइवी संक्रमित मरीजों की यूनिट और दवा कक्ष तक बिल्लियों...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 19 Feb 2026 08:52:55 PM (IST)Updated Date: Thu, 19 Feb 2026 08:52:54 PM (IST)
Indore के MYH अस्पताल में फिर लापरवाही... चूहों के बाद अब HIV यूनिट तक बिल्लियों का आतंक
Indore के MYH अस्पताल में फिर लापरवाही

HighLights

  1. MYH अस्पताल के HIV यूनिट और OPD परिसर में पहुंचीं बिल्लियां
  2. 6 महीने पहले चूहों के कुतरने से हुई थी दो नवजातों की मौत
  3. लापरवाही पर हाउसकीपिंग कंपनी पर लगा 25 हजार रुपये जुर्माना

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) में एक बार फिर लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। इस बार एचआइवी संक्रमित मरीजों की यूनिट और दवा कक्ष तक बिल्लियों की पहुंच देखी गई। इतना ही नहीं, अस्पताल के ओपीडी परिसर में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म भी दिया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब करीब छह महीने पहले इसी अस्पताल के नवजात वार्ड में चूहों द्वारा दो नवजातों को कुतरने से उनकी मौत हो गई थी।

ओपीडी में बिल्ली ने दिए तीन बच्चे

अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद ओपीडी और आसपास के हिस्सों में बिल्लियों की आवाजाही लगातार देखी गई। अस्पताल प्रबंधन ने तीन में से दो बच्चों को रेस्क्यू कर लिया है, जबकि तीसरे को पकड़ने की कार्रवाई जारी है।


एचआईवी दवा कक्ष तक पहुंचीं बिल्लियां

जानकारी के अनुसार एचआईवी संक्रमित मरीजों को हर महीने मुफ्त दवाएं देने वाले दवा कक्ष में भी बिल्लियों के घूमने और गंदगी फैलाने की शिकायत मिली है। इसी कक्ष में नवजात शिशुओं को दी जाने वाली सेप्ट्रोन दवाएं भी रखी जाती हैं। इससे संक्रमण नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

एआरटी केंद्र के कर्मचारी करते मिले देखभाल

अस्पताल के एआरटी (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) एकीकृत परामर्श केंद्र के कुछ कर्मचारी बिल्लियों की देखभाल करते नजर आए। इससे दवा कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं।

पुरानी घटनाओं से नहीं लिया सबक

करीब छह महीने पहले अस्पताल के नवजात वार्ड में चूहों ने दो बच्चों को कुतर दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उस घटना के बाद भी अस्पताल परिसर में जानवरों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने अस्पताल की स्वच्छता और प्रबंधन व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रबंधन की कार्रवाई और जुर्माना

मामले संज्ञान में आते ही हाउसकीपिंग कंपनी को परिसर खाली कराने और बिल्लियों को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। एमजीएम डीन डा. अरविंद घनघोरिया ने कहा कि इस मामले में जीरो टालरेंस की नीति अपना रहे हैं। ओपीडी दोपहर दो बजे के बाद बंद हो जाती है, इसलिए संक्रमण का खतरा नहीं है। साथ ही पेस्ट और एनिमल कंट्रोल एजेंसी की जवाबदेही भी तय की जाएगी। कंपनी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

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