शिप्रा नदी के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण की अनुमति नहीं, हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद शिप्रा नदी के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में रिसार्ट सहित अन्य निर्माण हो रहे है ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 07 Jan 2026 08:16:00 PM (IST)Updated Date: Wed, 07 Jan 2026 08:19:36 PM (IST)
इंदौर हाई कोर्ट का आदेश।HighLights
- बुधवार को हुई सुनवाई में सरकारी वकील ने जवाब के लिए समय मांगा।
- तब याचिकाकर्ता उज्जैन के सत्यनारायण सोमानी ने आपत्ति दर्ज कराई।
- कोर्ट ने सुनवाई आगे बढ़ाते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी की तय की।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सिंहस्थ से पहले शिप्रा नदी किनारे हो रहे निर्माण को लेकर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने कहा है कि शिप्रा नदी के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार की निर्माण अनुमति नहीं दी जाए।
हाई कोर्ट में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी ने शिप्रा किनारे हो रहे निर्माण को लेकर जनहित याचिका प्रस्तुत की थी। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने उज्जैन मास्टर प्लान के विरुद्ध शिप्रा नदी के 200 मीटर क्षेत्र में हो रहे निर्माण को लेकर शासन से जवाब देने को कहा था।
बुधवार को हुई सुनवाई में सरकारी वकील ने जवाब के लिए समय मांगा। इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति दर्ज कराई। कोर्ट ने सुनवाई आगे बढ़ाते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी की तय की।
कोर्ट ने कहा कि 21 जनवरी को भी शासन का जवाब नहीं आता है तो उज्जैन कलेक्टर और निगमायुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पडेगा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद शिप्रा नदी के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में रिसार्ट सहित अन्य निर्माण हो रहे हैं।
कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि चंदेसरा ब्रिज से राजगढ़ तक केवल वही शासन द्वारा करवाए जा रहे निर्माण ही हो सकेंगे। शिप्रा नदी के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।