
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। यूपीआइ ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित शुल्क (MDR) स्थगित होने के बाद इंदौर के बाजार में जश्न मनता दिखा। एमडीआर को दीपावली तक स्थगित किए जाने के ऐलान के बाद अहिल्या चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों ने राजवाड़ा के पास मिठाई बांटी।
अहिल्या चेंबर ने ही सबसे पहले एमडीआर के खिलाफ आवाज उठाई थी। देश में सबसे पहले इंदौर के बाजारों में नो यूपीआइ डे मना था। जश्न मना रहे व्यापारियों को अब भरोसा है कि आगे भी सरकार इस शुल्क को लागू नहीं करेगी।
सरकार ने 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआइ पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के रूप में 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद इंदौर के व्यापारियों ने विरोध करते हुए 23 सितंबर को नो यूपीआइ डे मनाया था।
इस दिन बाजारों में यूपीआइ भुगतान लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद प्रदेश और देश के अन्य व्यापारी संगठन आगे आए थे। इंदौर के व्यापारियों ने दूसरी बार फिर बैठक की थी और सवा सौ संगठनों ने घोषणा कर दी थी कि एमडीआर लागू होते ही यूपीआइ का पूर्णतः बहिष्कार कर लिया जाएगा।
मंगलवार को एमडीआर को दीपावली तक स्थगित करने की घोषणा के बाद अहिल्या चेंबर जश्न मनाने के लिए भी आगे आया। चेंबर के संयुक्त सचिव अक्षय जैन ने बाजार में व्यापारियों के साथ मिठाई वितरण कर खुशी जाहिर की। कहा कि ये व्यापारियों के संघर्ष की जीत है। हम डिजिटल पेमेंट के साथ हैं लेकिन इस पर अतिरिक्त खर्च नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
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अहिल्या चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि अभी व्यापारी आंदोलन स्थगित कर रहे हैं। आगे सरकार यदि फिर से एमडीआर लागू करेगी तो उसी के साथ यूपीआइ के बहिष्कार का दौर शुरू करेंगे।
हालांकि हमें उम्मीद है कि सरकार अब व्यापार हित में ऐसा नहीं करेगी। ताजा सूचना में भी एमडीआर को लागू करने की अगली कोई तारीख घोषित नहीं की है इसलिए उम्मीद है कि प्रस्ताव हमेशा के लिए स्थगित हो गया है।