
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में भूजल संरक्षण को लेकर नगर निगम ने अब रेन वाटर हार्वेस्टिंग अभियान की गति और तेज कर दी है। 1500 वर्गफीट से बड़े प्लॉट वाले आवासीय और व्यावसायिक भवनों के 35 हजार मालिकों को नोटिस भेजने के बाद अब इन भवनों का सर्वे शुरू कर दिया गया है।
निगम की टीमें मौके पर पहुंचकर यह जांच कर रही हैं कि भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है या नहीं। निगम ने इस वर्ष 15 हजार नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा था, जो पूरा हो चुका है। अब अभियान को आगे बढ़ाते हुए लक्ष्य बढ़ाकर 30 हजार कर दिया गया है।
दरअसल, इस साल गर्मी के मौसम में पानी को लेकर शहर में त्राहि-त्राहि मची थी। इसके बाद निगम ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग और रिचार्ज पिट को लेकर सख्ती बढ़ाई थी। नोटिस की समय-सीमा पूरी होने के बाद अब सत्यापन शुरू हुआ है। जिन भवनों में यह सिस्टम नहीं मिला, उन्हें नियमों की जानकारी देते हुए नोटिस भी भेजे जा रहे हैं।
निगम के अनुसार वर्ष 2022 के प्रावधानों के तहत निर्धारित श्रेणी के भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं होने पर अधिकतम पांच हजार रुपए तक का एकमुश्त जुर्माने का प्रावधान है। इसके बाद भी व्यवस्था नहीं करने पर रोज 100 रुपए अतिरिक्त जुर्माना वसूला जा सकता है। हालांकि निगम ने फिलहाल किसी भवन पर जुर्माना नहीं लगाया, बल्कि लोगों को पहले सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
निगम द्वारा तैनात एक एनजीओ की टीम नोटिस प्राप्त भवनों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार कर रही है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर को सुधारना है।