इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Clean City Indore। स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछले चार साल से सिरमौर बने इंदौर शहर को वाटर प्लस के 700 अंक मिल चुके हैं। ऐसे में अब इंदौर का पांचवी बार भी स्वच्छ शहरों में नंबर वन आने का दावा और भी मजबूत हो गया है। इंदौर शहर पिछले दो वर्षों से सेवन स्टार का तमगा पाने का प्रयास कर रहा था लेकिन कहीं -कहीं कोई कमी रह जाने के कारण इंदौर को अभी तक सेवन स्टार रेटिंग नहीं मिल पाई थी।

वाटर प्लस में अव्वल आने के बाद इस बार इंदौर को सेवन स्टार रेटिंग मिलने की संभावना भी काफी मजबूत हो गई है। ऐसे में यदि इंदौर को सेवन स्टार का खिताब भी मिल जाता है तो स्वच्छता में इंदौर पांचवीं बार भी नंबर वन आकर देशभर में एक मिसाल कायम करेगा। गौरतलब है कि इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन आने की होड़ में शीर्ष तीन शहरों में सूरत व नई दिल्ली शहर भी पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। वाटर प्लस के बाद यदि इंदौर शहर को सेवन स्टार रेटिंग भी मिल गई तो स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए अन्य शहरों के साथ इंदौर शहर के लिए ज्यादा प्रतिस्पर्धा नहीं रहेगी।

नंबर 1 का मुकाम हासिल करने की पूरी संभावना

वाटर प्लस का खिताब सेवन स्टार रेटिंग के लिए जरुरी था। हम दो बार से कोशिश कर रहे थे लेकिन सेवन स्टार रेटिंग हासिल नहीं कर पाए थे। इस बार उम्मीद है कि हमें सेवन स्टार रेटिंग जरुर मिलेगी। हमेशा की तरह इस बार भी इंदौर शहर के स्वच्छता में नंबर 1 का मुकाम हालिस करने की पूरी संभावना है। इसके लिए शहवासियों के साथ निगम की टीम ने बेहतर काम किया है।

- प्रतिभा पाल, निगमायुक्त

सफाई में भी हम इस बार अव्वल आएंगे

इंदौर सफाई में इस वर्ष भी बेहतर काम किया है। वाटर प्लस में बेहतर स्थान मिलने के बाद अब यह उम्मीद है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में भी इंदौर फिर से अव्वल आएंगे।

- संदीप सोनी, अपर आयुक्त निगम

इस तरह पाया मुकाम

-1746 सार्वजनिक व 5624 घरेलू अाउटफाल को बंद किया।

-100 किमी हिस्से में आउटफाल बंद करने के लिए सीवरेज लाइन डाली और इस पर 30 करोड़ रुपये खर्च हुए।

- 11 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू हुए और अब 310 एमएमलडी सीवरेज को पानी ट्रीट का स्वच्छ व साफ बनाया जा रहा है।

-102 एमलडी पानी का पुन: उपयोग किया जा रहा है। छह गांवों में 50 एमएलडी पानी सिंचाई में और शहर के 200 गार्डनों को सीधे पाइप लाइन से ट्रीट किया हुआ पानी पौधों के लिए दिया जा रहा है।

- 50 ट्रीट वाटर हाईड्रेड से 400 गार्डनों को पानी दिया जा रहा है। इसके साथ रोड डिवाइडर व ग्रीन बेल्ट के 100 किमी हिस्से में लगे पौधों को ट्रीट किया हुआ पानी दे रहे है।

- रोड स्वीपिंग व ड्रेनेज क्लिनिंग मशीन में ट्रीट किया हुआ पानी उपयोग हो रहा है।

- शौचालयों व यूरिनल की धुलाई में ट्रीट किया हुआ वाटर उपयोग किया जा रहा हैं।

खिताब बरकरार रखने के लिए इन कमियों को दूर करना है बाकी-

ग्रामीण क्षेत्र की पाइप लाइन: शहर में शामिल हुए नए ग्रामीण क्षेत्र में सीवरेज लाइन डाली जाना बाकी है। इस ग्रामीण क्षेत्र के करीब 100 किलाेमीटर के हिस्से में मौजूदा सीवरेज लाइन को नए प्लानिंग के हिसाब से बदलना है।

नालों में फिर दिख रही गंदगी व गंदा पानी: नीलकंठ कालाेनी के पीछे नाला वहां पर निगम द्वारा नाला टेपिंग पाइप डाली जा चुकी है। इसके बाद भी बाद नाले में गंदगी व गंदा पानी दिखाई दे रहा है। निगम द्वारा नाला टेपिंग कर नाले में आने वाले सीवरेज के पानी को रोका गया। बारिश के दौरान नाले जो पानी आता है उसकी निकासी के लिए दीवाल बनाकर जहां पानी आने-जाने पर रोक लगाई गई थी उस हिस्से को खोला गया है। इसके कारण नाले में फिर से गंदा पानी आ रहा है।

सीवरेज लाइन का रेक्टीफिकेशन: बड़ा गणपति क्षेत्र में कंडीलपुरा से लक्ष्मीबाई प्रतिमा तक जो सीवरेज लाइन डाली गई है उसके लेवल में अंतर है। इसके कारण उस क्षेत्र में पूर्ण क्षमता से सीवरेज लाइन नहीं चलती है। इसके अलावा पीपल्याहाना गांव से एग्रीकल्चर कालेज चौराहे तक डाली गई सीवरेज लाइन का लेवल समान न होने से ड्रेनेज के पानी की निकासी इस क्षेत्र में प्रापर नहीं नहीं है।

इसके अलावा बीआरटीएस में गीता भवन क्षेत्र में भी इसी वजह से सीवरेज लाइन का रेक्टिफिकेशन किया जा रहा है। इसके अलावा स्कीम नंबर 71 चांदमारी में भी सीवरेज लाइन के लेवल को ठीक किया जाना बाकी है। निगम के अफसरों के मुताबिक अगले तीन माह में इन हिस्सों की पाइप लाइन काे दुरस्त किया जाएगा।

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