
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : इंदौर में लगातार बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर हाई कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। इंदौर में बेकाबू शोर से खुद हाई कोर्ट भी परेशान दिखा। तीन वर्ष पुरानी याचिका पर सोमवार को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आदेश पारित किया।
पुलिस व प्रशासन के रूख से कोर्ट असंतुष्ट नजर आया। कोर्ट ने टिप्पणी कर दी कि नवरात्र और दशहरा पर अनियंत्रित शोर का हमने खुद सामना किया। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के मामले में इंदौर पुलिस को असहाय करार दिया। शोर पर रोक के लिए सात बिंदुओं पर कोर्ट ने निर्देश भी जारी कर दिए हैं और पुलिस-निगम और प्रशासन से पालन की रिपोर्ट भी तलब की है।
शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और बेलगाम डीजे,लाउड स्पीकरों के उपयोग पर दायर याचिका पर 2023 से सुनवाई चल रही है। पांच अक्टूबर को याचिका पर अंतिम सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा था जिसे सोमवार को जारी कर दिया गया। कोर्ट में पुलिस-प्रशासन व निगम ने ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए की गई कार्रवाई और सरकारी आदेश पेश किए।
कोर्ट इससे असंतुष्ट दिखा और टिप्पणी की कि त्योहारी सीजन में पूरे शहर ने ध्वनि प्रदूषण झेला, लेकिन पुलिस उसे रोकने और नियंत्रित करने में पूरी तरह असहाय दिखी। प्रशासन ने भी पूर्व के आदेशों का आधे-अधूरे मन से पालन किया। कोर्ट ने 24 सितंबर को साइलेंस जोन की सूची अखबारों में प्रकाशित करने को कहा था, लेकिन सरकार ने सिर्फ कटिंग की। कोर्ट ने इसे अधूरा पालन माना।इसके बाद अब कोर्ट ने सात बिंदुओं पर निर्देश जारी किए हैं।
अब फिर से पूरी लिस्ट व्यापक प्रसार वाले अखबारों में प्रकाशित करना होगी। यह भी निर्देश दिया कि जनता से सुझाव भी मांगे जाए कि किन प्रमुख स्थानों को साइलेंस जोन घोषित किया जाए।
सुनवाई के दौरान एसीपी खजराना आशीष पटेल ने ध्वनि प्रदूषण मापने वाला उपकरण पेश किया।ऐसे चार उपकरण पुलिस के पास है लेकिन अब तक इनका उपयोग ही नहीं किया गया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि हर थाने के फील्ड पर तैनात पुलिसकर्मियों को ऐसे उपकरण दिए जाएं और हर थाने का शिकायत नंबर अखबारों और इंदौर पुलिस की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए ताकि आम नागरिक तुरंत संपर्क कर सके।
कोर्ट ने माना कि कई लोग पुलिस के डर से थाने आकर शिकायत नहीं करते। इसलिए अब हर थाना प्रभारी को अपने क्षेत्र के हर वार्ड से 2 वालेंटियर नियुक्त करना होंगे। ये वालंटियर शोर करने वाले व्यक्ति या वाहन की सूचना और वीडियो पुलिस को देंगे। आम नागरिक भी इन वॉलंटियरों को भी शिकायत दे सकेंगे, जिस पर पुलिस को तत्काल कानूनी कार्रवाई करनी होगी।
कोर्ट ने इंदौर नगर निगम को भी निर्देश दिया है कि सुबह-सुबह घूमने वाली कचरा गाड़ियों पर फुल आवाज में बजने वाले स्वच्छता गीत की आवाज को वैध डेसिबल सीमा में लाया जाए। कोर्ट ने कहा मौजूदा वाल्यूम से 75 प्रतिशत कम कर अभी के मुकाबले सिर्फ 25 प्रतिशत रखें। सभी जिम्मेदारों को तीन सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट देना होगी। आदेश की कॉपी निगम के वकील ऋषि तिवारी को भी दी गई है।अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
उच्च न्यायालय के मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जो भी दिशा-निर्देश दिए है। उनका पालन किया जाएगा। सोमवार को शासकीय अवकाश होने के चलते मामला संज्ञान में नहीं आया है। मंगलवार को जो भी दिशा निर्देश प्राप्त होंगे उनका पालन करेंगे। -सतीश कुमार चौकसे, रीजनल आफिसर, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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