बकरे का दिल रखकर दिखाया तेज DJ का खौफनाक सच; नर्मदापुरम में राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता का हैरान करने वाला प्रयोग
पाराशर ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को तेज ध्वनि से बचाने के लिए खुले स्थानों और संकरी गलियों के लिए अलग-अलग डेसिबल लिमिट तय होनी चाहिए।
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 08:06:00 AM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 08:06:00 AM (IST)
साउंड बॉक्स पर बकरे का दिल रखकर डीजे के नुकसान का विज्ञान समझाते हुए विज्ञान शिक्षक राजेश पाराशर। नईदुनिया।HighLights
- तेज आवाज डीजे के सामने बकरे के दिल से किया लाइव डेमो
- साउंड बॉक्स के सामने बकरे का दिल रखकर तेज बास का असर दिखाया
- संकरी जगहों पर ध्वनि स्तर 6 से 12 डेसिबल तक बढ़ सकता है
नईदुनिया प्रतिनिधि, नर्मदापुरम। रिहायशी इलाकों और संकरी गलियों में बजने वाले डीजे का शोर बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों के लिए कितना घातक हो सकता है, इटारसी के एक विज्ञान प्रसारक ने इसका रोंगटे खड़े कर देने वाला जीवंत प्रदर्शन किया।
राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त राजेश पाराशर ने एक साउंड बॉक्स के सामने बकरे का दिल रख गया। तेज बास के साथ म्यूजिक चालू होते ही, बकरे के दिल में तीव्र कंपन होने लगा।
डीजे की तेज आवाज से बढ़ जाती है धड़कन
पाराशर ने समझाया कि इंसानी दिल की मांसपेशियां भी बकरे के दिल जितनी ही संवेदनशील होती हैं। डीजे का भारी बास हमारे शरीर से टकराकर दिल की धड़कन की प्राकृतिक लय को बिगाड़ देता है, जो दिल के मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
प्रयोग के दूसरे चरण में ध्वनि विज्ञान को समझाने के लिए साउंड बाक्स के दोनों तरफ प्लाइवुड की दीवारें खड़ी की गईं, जिससे डेसिबल मीटर में भारी उछाल दर्ज हुआ।
संकरी गलियों में होता रिफ्लेक्शन
राजेश पाराशर ने बताया कि खुली जगह में ध्वनि तरंगें हवा में फैल जाती हैं, लेकिन संकरी गलियों में क्रांकीट की दीवारें ध्वनि को रिफ्लेक्ट करती हैं, जिससे वहां टनल या अर्बन कैन्यन एकास्टिक्स या कैन्यन इफेक्ट पैदा होता है, इससे संकरी जगह पर ध्वनि का स्तर छह से 12 डेसिबल तक बढ़ जाता है। डेसिबल स्केल के मुताबिक, हर तीन डीबी की बढ़ोतरी का मतलब साउंड एनर्जी का दोगुना होना है।
पाराशर ने कहा कि वर्तमान नियमों में खुली जगह और बंद संकरी गलियों के लिए एक ही मानक तय हैं, जो कि इस प्रयोग के अनुसार सबसे बड़ी कमी है। खुली जगहों और संकरी गलियों के लिए अलग-अलग डेसिबल लिमिट तय की जाना चाहिए, ताकि मासूम बच्चों, बीमारों और बुजुर्गों को इस ध्वनि प्रताड़ना से बचाया जा सके।