Pollution Indore News: सांसों में घुलते प्रदूषण को माप रहे 50 सेंसर अध्ययन के जरिए होगी निराकरण की पहल
Pollution Indore News: सीआइआइ, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और लंग केयर फाउंडेशन कर रहे प्रयास। ...और पढ़ें
By gajendra.nagarEdited By: gajendra.nagar
Publish Date: Tue, 16 Nov 2021 07:15:00 AM (IST)Updated Date: Tue, 16 Nov 2021 08:38:32 AM (IST)

हर्षल सिंह राठौड़, इंदौर। शहर ने बेशक स्वच्छता में अपना नाम कर लिया है, लेकिन वायु प्रदूषण पर नियंत्रण कर पाना अभी भी चुनौती है। वायु प्रदूषण को कम करने या नियंत्रित करने के लिए हरियाली बढ़ाना तो बेहतर विकल्प है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी इस बात को जानना है कि शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण की असल वजह क्या है? कहां प्रदूषण का क्या स्तर है? वायु प्रदूषण अन्य स्थानों की वजह से यहां हो रहा है या यहां के कारण अन्य स्थानों तक फैल रहा है? ऐसी ही तमाम बातों को पता करने और उसके निराकरण के लिए शहर में 50 स्थानों पर सेंसर लगाए जा चुके हैं जो हवा में घुले प्रदूषण के स्तर को माप रहे हैं। उनसे पता चला कि शहर में प्रदूषण का स्तर 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच जाता है।
अध्यययन का यह काम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के साथ सीआइआइ-क्लीन एयर बेटर लाइफ प्रोजेक्ट कर काम रहा है। इसमें आइआइटी दिल्ली और लंग केयर फाउंडेशन उनका साथ दे रहे हैं। आइआइटी दिल्ली के साथ माडल तैयार कर इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जा रहा है। शहर में वायु प्रदूषण का स्तर जानने के लिए 3 नवंबर को पीएम 2.5 वाले 50 सेंसर शहर के भीतरी और बाहरी दोनों भागों में लगाए गए हैं। बात अगर शहर के भीतरी भाग की करें तो व्यस्ततम बाजार के अलावा अस्पताल, कार्यालय, विद्यालय, सामुदायिक भवन में और बाहरी भाग में बायपास, रिंगरोड आदि पर यह सेंसर लगाए जा चुके हैं। एक माह के लिए लगे इस सेंसर से प्रदूषण का स्तर और उसकी वजह के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
सीआइआइ के काउंसलर मोहित शर्मा के अनुसार यह कार्य इसलिए किया जा रहा है ताकि शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर, उसके कारणों को पता लगाया जा सके। इसके अध्ययन के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम किया जा सकेगा। इससे प्रदूषण के स्तर की जानकारी तो मिलेगी ही, साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि कहां कितना दबाव है? प्रदूषण का स्तर मापने के लिए इन सेंसर के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सैटेलाइट की भी मदद ली जाएगी।
इस तरह होगा कार्य
लंग केयर फाउंडेशन की मातृश्री शेट्टी कहती हैं कि प्रदूषण पर काबू पाने के लिए पहले उसका हर स्थान पर, अलग-अलग वक्त में स्तर जानना जरूरी है। साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि प्रदूषण की वजह क्या है? यह जानने के बाद उसके स्थायी निराकरण पर विचार किया जा सकता है। कई बार यह भी देखा गया है कि स्थान विशेष पर बढ़ा वायु प्रदूषण आसपास के उद्योगों, खेतों में लगाई जाने वाली आग आदि के कारण भी बढ़ता है। ऐसे में उसके निराकरण के लिए अलग तरीके अपनाने होते हैं। कारण और निवारण के लिए बाद में लोगों को जागरूक किया जाएगा।
800 तक पहुंचा शहर में प्रदूषण का स्तर
संस्था द्वारा 30 और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट द्वारा 20 सेंसर शहरभर में लगाए गए हैं। 50 में से 30 सेंसर शहर के बाहरी भागों में लगाए गए हैं। 3 नवंबर से अभी तक इस सेंसर के जरिए प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार शहर में आम दिनों में प्रदूषण का स्तर 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच जाता है जो कि 40 माइक्रोग्राम पर मीटर क्यूब से कम होना चाहिए। यही नहीं, दीपावली पर यह स्तर 800 तक पहुंच गया। भवन के भीतर लगे सेंसर से यह पता चला कि प्रदूषण का जितना स्तर बाहर होता है, उसका 50 प्रतिशत स्तर भवन के भीतर होता है। सेंसर के कारण यह भी जानकारी सामने आई कि कुल प्रदूषण में से एक-तिहाई प्रदूषण शहर के बाहर से शहर में आता है। शहर में होने वाले प्रदूषण में से दो-तिहाई प्रदूषण वाहनों और निर्माण कार्यों के कारण हो रहा है।
तीन प्रोजेक्टों के साथ किया जा रहा प्रयास
शहर में प्रदूषण का स्तर मापने और बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए क्या उपाय किए जाएं, इसके लिए जान्स नो इंडिया, सीआइआइ और क्लीन एयर कैटलिस्ट इन तीन प्रोजेक्ट के माध्यम से स्मार्ट सिटी प्रदूषण का स्तर और उसके निराकरण के लिए काम कर रहा है। इसके तहत शहर में कई स्थानों पर सेंसर लगाए गए हैं। कुछ स्थानों पर सेंसर लग चुके हैं और कुछ स्थानों पर सेंसर लगना शेष हैं। प्रदूषण स्तर के आंकड़े प्राप्त होने लगे हैं।
-ऋषव गुप्ता, सीइओ, स्मार्ट सिटी