Potato Cluster Indore: नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए आकार लेने वाला मध्य प्रदेश का पहला आलू क्लस्टर अब तक कागजों में
Potato Cluster Indore: चार साल पहले प्रशासन ने इस सेक्टर को ‘एक जिला एक उत्पाद’ कार्यक्रम में भी जोड़ा था, लेकिन इन चार साल में आलू क्लस्टर प्रोजेक्ट ...और पढ़ें
By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Mon, 29 Jan 2024 10:00:29 AM (IST)Updated Date: Mon, 29 Jan 2024 12:44:23 PM (IST)
खेतों में शुरू हो गए अवैध कारखाने। फोटो- नईदुनिया Potato Cluster Indore: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जिले की महू तहसील आलू चिप्स के लिए मशहूर हैं। यहां आलू से बनने वाली चिप्स देशभर के साथ ही खाड़ी देशों तक पसंद की जाती है, लेकिन इस सेक्टर के संगठित नहीं होने से अब तक राष्ट्रीय स्तर पर पहचान नहीं मिल पाई है। चार साल पहले प्रशासन ने इस सेक्टर को ‘एक जिला एक उत्पाद’ कार्यक्रम में भी जोड़ा था, लेकिन इन चार साल में आलू क्लस्टर प्रोजेक्ट कागजों से बाहर नहीं आया। हालांकि गत वर्ष इस क्लस्टर के लिए जमीन की कवायद शुरू हो चुकी है।
मानपुर के पास कुआली गांव के नजदीक 25 एकड़ जमीन पर यह प्रोजेक्ट आकार लेगा। हाल ही में इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने ‘एक जिला एक उत्पाद’ के तहत चिह्नित आलू चिप्स को भी एक्सपोर्ट करने की बात कहीं है। इसके लिए उत्पादन यूनिट बढ़ाने को कहा। बता दे कि महू तहसील में फरवरी से मई के बीच संचालित होने 150 से अधिक कारखाने जमकर प्रदूषण फैलाते है।
मानपुर के पास कुवाली में 25 एकड़ जमीन पर बनने वाले क्लस्टर में प्रोसेसिंग यूनिट, स्टोरेज और एक्जीविशन सेंटर सहित मिलेगी। तमाम आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही चिप्स कारखानों से निकलने वाले दूषित पानी से प्रदूषित हो रही नदियों को बचाया जा सकेगा। चिप्स क्लस्टर में
इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) प्लांट लगाया जाएगा। यहां दूषित पानी को फिल्टर करने के बाद नदियों में छोड़ा जाएगा।
भारत सरकार के माइक्रो स्माल इंटरप्राइजेस क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमएसईसीडीपी) योजना के तहत बनने वाले इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 15 करोड़ रुपये है। जिला उद्योग केंद्र के जीएम एसएस मंडलोई ने बताया कि यह चिप्स क्लस्टर प्रदेश का पहला है। इसमें पहले बिजली, पानी, सडक़ आदि मूलभूत सुविधाएं तैयार की जाएगी। इसके बाद चिप्स उत्पादन के दौरान निकलने वाले प्रदूषित जल को साफ करने के इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी), आधुनिक मशीन, प्रोसेसिंग यूनिट, स्टोरेज, एक्जीबिशन सेंटर, आफिस आदि की सुविधाएं भी रहेगी। इसके साथ ही क्लस्टर तैयार होने पर २० हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। प्रोजेक्ट में 60 फीसदी राशि केंद्र तो 40 फीसदी राशि राज्य सरकार वहन करेगी।
चिप्स लेकर पशु आहार तक
मंडी से खरीदे गए आलू की मशीनों से छिलाई व धुलाई की जाती है। स्लाइजर से कटिंग कर फिर फूड ग्रेड का केमिकल मिलाकर धुलाई कर उबाला जाता है। इसके बाद खुले खेतों में त्रिपालों पर सुखाया जाता है। इसके बाद पैकेजिंग कर सीधे बाजार में उतार दिया जाता है। चिप्स के साथ ही पशु आहार भी बनाया जाता है।
साफ पानी हो जाता है काला
आलू कटिंग और वाशिंग के दौरान बड़ी मात्रा में स्टार्च निकलता है। 99 फीसदी कारखानों से इस स्टार्च युक्त पानी को नाले में बहा दिया जाता है। नाले के माध्यम से स्टार्च मिला पानी गंभीर नदी में पहुंचता है। जिससे पानी में बीओडी (बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड) और सीओडी (केमिकल आक्सीजन डिमांड) बढ़ जाती है और पानी एसिडिक हो जाता है। जिससे आसपास दुर्गंध बढ़ जाती है। आसपास के जल स्त्रोत का पानी प्रभावित होता है। यहीं पानी आगे यशवंत सागर में मिल जाता है। इसलिए इस पानी का मौके पर ही ट्रीट करना जरूरी है।
चिप्स क्लस्टर को लेकर मानपुर स्थित कुवाली गांव के पास 25 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली है, जिसकी ट्रांसफर प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद डीपीआर पर काम किया जाएगा।
- एसएस मंडलोई, जीएम, जिला उद्योग व्यापार केंद्र इंदौर