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2055 तक इंदौर की प्यास बुझाने की तैयारी, नर्मदा के चौथे चरण का तेजी से चल रहा है काम

जनसंख्या बढ़ने के साथ शहर में पानी की मांग भी लगातार बढ़ेगी। आने वाले वर्षों में जल संकट का दबाव न बढ़े, इसके लिए नगर निगम ने नर्मदा के चौथे चरण के का...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 08:42:39 AM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 08:42:39 AM (IST)
2055 तक इंदौर की प्यास बुझाने की तैयारी, नर्मदा के चौथे चरण का तेजी से चल रहा है काम
तेजी से चल रहा है इंटेकवेल का काम। -नईदुनिया

HighLights

  1. तेजी से चल रहा है 1650 एमएलडी क्षमता के इंटेकवेल का काम
  2. 2028 तक तैयार हो जाएगा 400 एमएलडी का नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
  3. महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जलूद में किया काम का निरीक्षण

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : जनसंख्या बढ़ने के साथ शहर में पानी की मांग भी लगातार बढ़ेगी। आने वाले वर्षों में जल संकट का दबाव न बढ़े, इसके लिए नगर निगम ने नर्मदा के चौथे चरण के काम में तेजी लाने की तैयारी की है। परियोजना के तहत 1650 एमएलडी क्षमता का इंटेकवेल तैयार किया जा रहा है।

इसके पूरा होने पर शहर की जल आपूर्ति क्षमता बढ़ेगी और वर्ष 2055 तक की अनुमानित जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यवस्था मजबूत होगी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को जलूद पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों और इंजीनियरों से प्रगति की जानकारी लेकर काम गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।


भविष्य की आवश्यकता के हिसाब से तैयार कर रहे इंटेकवेल

नर्मदा के चौथे चरण के लिए बनाया जा रहा इंटेकवेल भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। महापौर ने बताया कि इसमें फिलहाल 15 पंप इंस्टॉल किए जाएंगे। भविष्य में पांचवें चरण की जरूरत पड़ने पर इसमें नौ और पंप लगाने का विकल्प रहेगा।

इंटेकवेल का डायमीटर 120 मीटर और ऊंचाई 44 मीटर होगी। इसका निर्माण दो हिस्सों में किया जा रहा है, जिनमें प्रत्येक का डायमीटर 60 मीटर रहेगा। संरचना इस तरह तैयार की जा रही है कि बांध का जलस्तर कम होने या बांध बंद होने की स्थिति में भी इंटेक अपनी क्षमता के अनुरूप काम कर सके।

1650 एमएलडी क्षमता से बढ़ेगी जलापूर्ति

नर्मदा के चौथे चरण में 1650 एमएलडी क्षमता का इंटेक वेल बनाया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर को वर्तमान की तुलना में लगभग दोगुना पानी उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। इससे बढ़ती मांग को पूरा करने और मौजूदा जल आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

2028 तक तैयार होगा 400 एमएलडी का नया संयंत्र

योजना में पानी की शुद्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। फिलहाल पहले और दूसरे चरण में 180 एमएलडी तथा तीसरे चरण में 360 एमएलडी क्षमता के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट काम कर रहे हैं। इसके अलावा 400 एमएलडी क्षमता का नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करने का काम शुरू हो चुका है।

इसे वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नया प्लांट शुरू होने पर पानी को शुद्ध कर आपूर्ति व्यवस्था में शामिल किया जा सकेगा। इससे बढ़ती आबादी की जरूरतों के अनुरूप जल शोधन क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।

जलूद से इंदौर तक पाइपलाइन का काम तेज करने के निर्देश

महापौर ने जलूद से इंदौर तक बिछाई जा रही पाइपलाइन के काम को भी देखा। उन्होंने प्रोजेक्ट के लिए तैयार किए जा रहे 500 पाइपों की खेप और मौके पर पहुंच चुके पाइपों की स्थिति देखी। इसके बाद पाइपलाइन बिछाने की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों से निर्माण की गति और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की।

महापौर ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों को निर्देश दिए कि काम में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए। निरीक्षण के दौरान जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू, संबंधित अधिकारी और निर्माण एजेंसी के इंजीनियर उपस्थित थे।

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