• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

'छह महीने में जूनियर वकीलों के स्टाइपेंड की गाइडलाइन तैयार करें', एमपी हाई कोर्ट ने दिए निर्देश

Junior Lawyers Stipends: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 15 अक्टूबर 2024 के सर्कुलर का उल्लेख भी किया है।

By Kuldeep BhawsarEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 12:48:04 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 01:19:32 PM (IST)
'छह महीने में जूनियर वकीलों के स्टाइपेंड की गाइडलाइन तैयार करें', एमपी हाई कोर्ट ने दिए निर्देश
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ का बड़ा फैसला। - प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें कोई स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा है
  2. शहरी क्षेत्र में 20 हजार और ग्रामीण में 15 हजार रुपये प्रतिमाह की सिफारिश
  3. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह सर्कुलर सिर्फ सिफारिशात्मक प्रकृति का है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड दिए जाने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने मप्र राज्य अधिवक्ता परिषद से कहा है कि वह छह माह में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के परामर्श से जूनियर अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड तय करने संबंधी गाइडलाइन तैयार करे। हाई कोर्ट ने शहरी क्षेत्र में 20 हजार रुपये और ग्रामीण क्षेत्र में 15 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाने की सिफारिश की है।

दरअसल, कुछ जूनियर अधिवक्ताओं ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें कोई स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि नियामक संस्था होने के नाते राज्य अधिवक्ता परिषद को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जूनियर अधिवक्ताओं को उनके खर्च और आवागमन के लिए स्टाइपेंड मिले।


हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 15 अक्टूबर 2024 के सर्कुलर का उल्लेख भी किया है। इसमें जूनियर अधिवक्ताओं को नियुक्ति की तारीख से कम से कम तीन वर्ष तक न्यूनतम स्टाइपेंड देने की सिफारिश की गई है। बार काउंसिल आफ इंडिया ने शहरी क्षेत्र में 20 हजार रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की सिफारिश की है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह सर्कुलर सिर्फ सिफारिशात्मक प्रकृति का है। कोर्ट ने राज्य अधिवक्ता परिषद और हाई कोर्ट बार एसोसिएशनों को निर्देशित किया है कि वे सभी जूनियर अधिवक्ताओं को उनके वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए किए जाने वाले कार्य का स्टाइपेंड दिलाना सुनिश्चित करें, ताकि शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ता अपने रोजमर्रा के खर्च उठा सकें। कोर्ट ने राज्य अधिवक्ता परिषद से यह जांच करने के लिए भी कहा है कि याचिकाकर्ता को स्टाइपेंड का भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें- लापता व्यक्ति नहीं मिला तो MP High Court ने खींची न्यायिक सीमा, कहा-स्टेटस रिपोर्ट अनंतकाल तक नहीं मंगाई जा सकती

जूनियर अधिवक्ताओं को मिलेगी राहत

हाई कोर्ट के इस फैसले से जूनियर अधिवक्ताओं को राहत मिलेगी। सामान्यत: वकालत स्थापित होने में चार से पांच वर्ष लग जाते हैं। ऐसे में अगर जूनियर अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड तय हो जाएगा, जो उन्हें तीन वर्ष तक मिलेगा, तो उन्हें वकालत के क्षेत्र में खुद को स्थापित करने में मदद मिलेगी। - राजेश खंडेलवाल, एडवोकेट

स्वागत योग्य कदम है

यह स्वागत योग्य कदम है। हालांकि जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड शासन की ओर से या राज्य अधिवक्ता परिषद की ओर से मिलना चाहिए। जब शासन जूनियर डाक्टरों को स्टाइपेंड दे सकता है तो फिर जूनियर अधिवक्ताओं को देने में क्या दिक्कत हो सकती है। - एडवोकेट मनीष यादव, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष