
कुलदीप भावसार, नईदुनिया, इंदौर : ट्रेन के कोच में कॉकरोच, गंदे वॉशरूम और सीलिंग से पानी टपकने जैसी अव्यवस्थाओं को जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की सेवा में कमी माना है। यात्रियों की शिकायतों के बावजूद समस्या का उचित निराकरण नहीं करने पर आयोग ने पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल को परिवादियों को 10 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है।
यह राशि मानसिक संताप और परिवाद व्यय के लिए देनी होगी। रेलवे को एक माह के भीतर भुगतान करना होगा। निर्धारित अवधि में राशि नहीं देने पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। परिवादी सुशीला पानोत और अन्य ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद प्रस्तुत कर बताया था, कि उन्होंने छह अगस्त 2023 को इंदौर से यशवंतपुर जंक्शन के लिए ट्रेन यात्रा शुरू की थी।
यात्रा के दौरान कोच में कॉकरोच मिलने, वॉशरूम की खराब स्थिति और सीलिंग से पानी टपकने सहित कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। यात्रियों ने इन अव्यवस्थाओं की शिकायत रेलवे हेल्पलाइन, रेल मदद एप, कोच अटेंडेंट और टिकट जांच कर्मचारियों से की, लेकिन उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली।
काफी देर बाद हाउसकीपिंग कर्मचारियों ने कीटनाशक का छिड़काव किया, लेकिन इससे भी समस्या दूर नहीं हुई। परिवादियों का कहना था कि शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें अपनी यात्रा बीच में ही समाप्त करनी पड़ी। उन्होंने कोचिगुडा स्टेशन पर भी रेलवे की सेवाओं में कमी को लेकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से इन आरोपों से इन्कार किया गया। परिवादियों ने अपने पक्ष में यात्रा टिकट, रेल मदद एप पर दर्ज शिकायतों के स्क्रीनशाट और कोचिगुडा स्टेशन पर दी गई लिखित शिकायत की प्रति प्रस्तुत की। आयोग ने पाया कि रेलवे की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिया गया, जिससे साबित हो कि यात्रियों की समस्याओं का उचित निराकरण कर दिया गया था।