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इंदौर-उज्जैन के बीच 77 किमी लंबे पूर्वी रिंग रोड के लिए 15 हेक्टेयर वनभूमि की जरूरत

सिंहस्थ 2028 से पहले इंदौर-उज्जैन की कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए 77 किमी लंबे पूर्वी रिंग रोड का काम तेज हो गया है।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sun, 26 Apr 2026 07:34:27 AM (IST)Updated Date: Sun, 26 Apr 2026 07:37:41 AM (IST)
इंदौर-उज्जैन के बीच 77 किमी लंबे पूर्वी रिंग रोड के लिए 15 हेक्टेयर वनभूमि की जरूरत
डकाच्या से पीथमपुर तक बनेगी सड़क!

HighLights

  1. 38 गांवों से गुजरेगा रिंग रोड, कंपेल, खुड़ैल, तिल्लौर, बड़गोंदा शामिल
  2. मध्य प्रदेश राज्य पर्यावरण समिति कर रही प्रस्ताव का अध्ययन
  3. दो हिस्सों में 38 और 39 किमी की सड़क, 40 महीने में पूरा करने का लक्ष्य

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले से पहले उज्जैन से इंदौर शहर को जोड़ा जाना है। बेहतर कनेक्टिविटी के लिए पूर्वी रिंग रोड प्रोजेक्ट से जुड़ी गतिविधियां तेज हो गई हैं। करीब 77 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को बनाया जाना है, जिसमें राजस्व के अलावा लगभग 15 हेक्टेयर वनक्षेत्र शामिल है।

इस क्षेत्र में मौजूद 1500 से ज्यादा पेड़ों को चिह्नित किया जा रहा है। हालांकि अभी पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी मिलना बाकी है। प्रोजेक्ट के लिए वनभूमि को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने काफी पहले प्रस्ताव बनाकर वन विभाग को भेज रखा है।


इंदौर वनमंडल से फाइल राज्य स्तर पर्यावरण समिति तक पहुंच चुकी है। जहां समिति इन दिनों प्रस्ताव का अध्ययन करने में लगी है। उम्मीद है कि मई के पहले सप्ताह में यह प्रस्ताव केंद्र के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेज दिया जाएगा।

38 गांवों से होकर गुजरेगी

मंजूरी मिलने के बाद ही पेड़ों की कटाई, जमीन अधिग्रहण और पौधारोपण का खर्च तय होगा। यह सड़क डकाच्या से पीथमपुर तक बनाई जाएगी और करीब 38 गांवों से होकर गुजरेगी। इनमें कंपेल, खुड़ैल, तिल्लौर और बड़गोंदा जैसे गांव शामिल हैं।

इस प्रोजेक्ट में निजी जमीन के बजाय सरकारी जमीन को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि लोगों पर कम असर पड़े। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव का कहना है कि वनभूमि के लिए प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। जल्द ही अनुमति मिल सकती है। उसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

40 महीने में पूरी होगी सड़क

करीब 4000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क दो हिस्सों में तैयार होगी। एक हिस्सा 38 किमी और दूसरा 39 किमी का होगा। सरकार ने इसे मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 40 महीने की समयसीमा तय की गई है।

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